Heatwave: मुंबई में लू लगने से 11 लोगों की मौत, जानिए लक्षण और कैसे करें बचाव

Heatwave: देश के कई इलाकों में भीषण गर्मी का प्रकोप शुरू हो गया है। ऐसे में अपना खुद का खयाल रखना बेहद जरूरी है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को खास तौर से ध्यान देने की जरूरत है। डायबिटीज और ब्लड प्रेशर (diabetes and blood pressure) से पीड़ित लोगों को सतर्क रहना चाहिए। इसकी जगह जूस और फलों का सेवन करना चाहिए

अपडेटेड Apr 18, 2023 पर 12:47 PM
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डॉक्टरों की ओर से कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, चाय, कॉफी जैसी चीजों से दूर रहने की सलाह दी गई है

Heatwave: महाराष्ट्र में एक बेहद दर्दनाक हादसा हो गया था। एक कार्यक्रम के दौरान लू लगने से 11 लोगों की जान चली गई थी। जबकि कई लोग बीमार हो गए थे। ये हादसा नवी मुंबई में महाराष्ट्र भूषण अवॉर्ड समारोह के दौरान हुआ। समारोह में आए लोगों की गर्मी से हालत बिगड़ती देख उन्हें फौरन अस्पताल भेजा गया। लेकिन तब तक 11 लोगों ने दम तोड़ दिया था। इससे हजारों लोग डिहाइड्रेशन (dehydration) के शिकार हो गए। देश में हीटस्ट्रोक (heatstroke-लू) के चलते होने वाली मौतें कोई सामान्य घटनाएं नहीं हैं। लगभग हर अस्पतालों में लू लगने की घटनाएं सामने आती हैं। अप्रैल महीने से ही कई राज्यों में गर्मी का प्रकोप शुरू हो जाता है। कई राज्यों में शहरों के अस्पतालों में पहले से ही मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

लू लगने से शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। स्किन गर्म और शुष्क हो जाती है। तेज दिल की धड़कन, सिरदर्द, चक्कर आना, मतली, भ्रम और बेहोशी जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं। ऐसे में गर्मी के मौसम में अगर आप भी कुछ इसी तरह के लक्षणों का सामना कर रहे हैं तो फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

हीटस्ट्रोक क्या है?


हीट स्‍ट्रोक या सन स्‍ट्रोक को आम बोलचाल की भाषा में 'लू लगना' कहते हैं। ये तब होता है। जब शरीर अपने तापमान को कंट्रोल नहीं कर पाता है। हीटस्ट्रोक होने पर शरीर का आंतरिक तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है। यह कम नहीं हो पाता है। जब किसी को लू लगती है तो शरीर का स्वेटिंग मैकेनिज्म यानी पसीना तंत्र भी फेल हो जाता है। ऐसी स्थिति में इंसान को बिल्कुल पसीना नहीं आता है। हीटस्ट्रोक की चपेट में आने पर शरीर का तापमान 40 डिग्रीसेल्सियस या 104°F से ज्यादा हो सकता है। समय रहते अगर इसका इलाज नहीं किया गया तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।

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डॉक्टरों ने कहा- लू को हल्के में न लें

न्यूज 18 से बातचीत के दौरान नारायण मल्टी-स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल (Narayana Multi-speciality Hospital), अहमदाबाद के कंसल्टेंट, डॉ. मनीष माहेश्वरी (Dr Manish Maheshwari) का कहना है कि यह एक गंभीर स्थिति हैं। इसमें मौत का जोखिम भी बढ़ जाता है। इसे गंभीरता से लेना चाहिए। इलाके में पिछले एक हफ्ते से औसत तापमान करीब 40 डिग्री दर्ज किया जा रहा है। जैसे ही भीषण गर्मी का प्रकोप शुरू हो जाता है। अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या बढ़ने लगती है। हमारे यहां रोजाना हीटस्ट्रोक के 5-6 मामले आ रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि हर साल अप्रैल से जून तक बड़ी संख्या में हीटस्ट्रोक के मामले सामने आते हैं। ऐसे ही कोलकाता के डॉ. संदीप जैन (Dr Sandeep Jain) का भी कहना है कि अस्पताल में हीट स्ट्रोक के मामले बढ़ने लगे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल भी अप्रैल में हीटस्ट्रोक के मामले बढ़ने लगे थे। यह इजाफा मई और जून मध्य तक जारी रहा।

करें ये उपाय

डॉक्टरों का कहना है कि कैफीन से बचाव करना चाहिए। इसकी जगह उन्हें ताजे फलों का जूस और छाछ जैसे पदाथों का सेवन करना चाहिए। अगर बच्चों को या गर्भवती महिलाओं को दिन में बाहर जाने की जरूरत पड़ती है तो धूप के सीधे संपर्क में आने से बचना चाहिए। छाते का इस्तेमाल करना चाहिए। ढीले कपड़े पहनना चाहिए। हमेशा पानी पीते रहें। शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। अधिक से अधिक फलों और हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

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