Masan Holi 2023: काशी में जलती चिताओं की राख से खेली गई अद्भुत होली, शोभा यात्रा में 50,000 शिव भक्त हुए शामिल

बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी के श्मशान घाटों पर भगवान शिव के भक्त अद्भुत तरीके से होली खेलते हैं। महादेव के इस शहर में भोले के भक्त सिर्फ रंग और गुलाल से नहीं, बल्कि श्मशान घाटों पर जलती चिताओं की राख से होली खेलते है। शुक्रवार को ऐसा अद्भुत नजारा वाराणसी के सबसे डरावने श्मशान घाटों में से एक हरिश्चंद्र घाट पर देखने को मिला। मसान होली की शोभा यात्रा में डमरू के डमडम के बीच शव लेकर जाते लोग और जलती चिताओं के बीच चिता भस्म से होली खेलते शिव भक्तों का नजारा हैरान करने वाला था

अपडेटेड Mar 04, 2023 पर 11:33 AM
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Masan Holi 2023: महादेव की नगरी काशी में भोले के भक्त सिर्फ रंग और गुलाल से नहीं बल्कि चिता की राख से भी होली खेलते है

Masan Holi 2023: बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी की मसान होली (Masan Holi) दुनिया भर में प्रसिद्ध है। दरअसल, वाराणसी के श्मशान घाटों पर भगवान शिव के भक्त अद्भुत तरीके से होली खेलते हैं। महादेव के इस शहर में भोले के भक्त सिर्फ रंग और गुलाल से नहीं, बल्कि श्मशान घाटों पर जलती चिताओं की राख से होली खेलते है। शुक्रवार को ऐसा अद्भुत नजारा वाराणसी के सबसे डरावने श्मशान घाटों में से एक हरिश्चंद्र घाट (Harishchandra Ghat) पर देखने को मिला। इसके साथ ही वाराणसी की मसान होली की शुरुआत हो चुकी है। वाराणसी में होली खेलने की यह सबसे अजीब परंपराओं में से एक है।

Masan Holi होली से पांच दिन पहले आयोजित की जाती है। उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक राजधानी में यह होली उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। मसान होली की शोभा यात्रा में डमरू के डमडम के बीच शव लेकर जाते लोग और जलती चिताओं के बीच चिता भस्म से होली खेलते शिव भक्तों का नजारा हैरान करने वाला था। मसान होली की विशेष शोभा यात्रा में 50,000 से अधिक लोग शामिल हुए।

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इस साल मसान होली समारोह की भव्य शुरुआत तब हुई, जब शिव भक्तों ने अघोर पीठ बाबा कीनाराम आश्रम से शोभा यात्रा निकाली। जुलूस में 50,000 से अधिक लोगों की भागीदारी देखी गई, जिनमें से अधिकांश ने भगवान शिव के अनुयायियों के रूप में कपड़े पहने थे। सोनारपुरा और भेलूपुरा को भी कवर करने वाली लगभग 5 किलोमीटर लंबी जुलूस दोपहर 3 बजे राजा हरिश्चंद्र घाट पर समाप्त हुई। इस दौरान लोग जलती हुई चिताओं के बीच होली का उत्सव मनाते हुए दिखाई दिए। हरिश्चंद्र घाट पर हुई मसान होली में देश के अलग अलग हिस्सों से औगढ़ और अघोरी आए थे।

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श्मशान घाट पर जलती चिताओं के बीच होली खेली। इस दौरान किन्नर, देसी और विदेशी पर्यटक भी इस अद्भुत होली के गवाह बने। रंगभरी एकदाशी (Rangbhari Ekadashi) के दिन हुई इस होली में 8 क्विंटल से ज्यादा भस्म उड़ी और लोग महादेव के रंग में रंग गए। आयोजकों ने बताया कि हरिश्चंद्र घाट पर होने वाले मसाने की होली के बारे में जैसे लोगों को मालूम हो रहा है देश-विदेश से भक्तों की भीड़ इकट्ठा होती है। इस शोभायात्रा में शामिल लोग यह भूल जाते हैं कि वह क्या है...जो हैं सब बाबा मसान नाथ और भगवान विश्वनाथ हैं।

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लोग शव से दूर भागते हैं लेकिन यहां लोग आकर मसाने की आंच अपने ऊपर डलवा कर अपने को सौभाग्यशाली और भाग्यशाली समझते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, होली के इस उत्सव में बाबा विश्वनाथ देवी देवता, यक्ष, गन्धर्व सभी शामिल होते हैं। साथ ही उनके प्रिय गण भूत, प्रेत, पिशाच, दृश्य, अदृश्य, शक्तियां जिनकों बाबा खुद इंसानों के बीच जाने से रोककर रखते हैं। लेकिन अपने दयालु स्वभाव की वजह से वो अपने इन सभी प्रियगणों के बीच होली खेलने के लिए घाट पर आते हैं।

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वाराणसी घूमने आए शिव भक्त हरिश्चंद्र घाट पर मसाने की होली में शामिल होकर बेहद उत्साहित नजर आए। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमें नहीं मालूम था कि यहां ऐसा होता है। होली के ऐसे उत्सव को देखकर हम बेहद उत्साहित हैं। माना जाता है कि भगवान शिव खुद अपने भक्तों को भस्म होली खेलने की अनुमति देते हैं।

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