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Holi 2024: मथुरा में भक्तों ने प्राचीन राधा रमण मंदिर में खेली होली, 500 साल से जल रही है अग्नि

Holi in Shri Radha Raman Temple: ब्रज की होली पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां वृंदावन में प्राचीन राधा रमण मंदिर में पिछले करीब 500 साल से रसोई में अग्नि जल रही है। उसी से सबको भोजन बनता है। यहां आरती के लिए माचिस से आग नहीं जलाई जाती। यहां होली का उल्लास छाने लगा है। यहां जमकर अनोखे अंदाज में होली खेली जाती है

Jitendra Singhअपडेटेड Mar 07, 2024 पर 8:15 AM
Holi 2024: मथुरा में भक्तों ने प्राचीन राधा रमण मंदिर में खेली होली, 500 साल से जल रही है अग्नि
Holi 2024: राधा रमण मंदिर में ठाकुर जी की एक मूर्ति है। लेकिन उस एक मूर्ति में तीन छवि नजर आती हैं।

Holi 2024: होली का त्योहार देश भर में धूमधाम से मनाया जाता है। मथुरा की होली का अगर नाम आता है तो यहां होली का अंदाज ही अनोखा हो जाता है। ब्रज की होली पूरी दुनिया में मशहूर है। देश विदेश से लोग यहां होली खेलने आते हैं। होली के 40 दिन पहले से ही यहां होली का उत्सव शुरू हो जाता है। ऐसे ही वृंदावन के श्री राधारमण मंदिर (Shri Radha Raman Temple, Vrindavan) की होली भी बेहद अनोखी है। यहां की लीलाएं सुनकर हैरान रह जाएंगे। एक बार यहां की होली में पहुंच गए तो फिर पूरी जिंदगी इसे नहीं भुला पाएंगे।

वृंदावन के प्राचीन राधारमण मंदिर में होली के त्योहार के 40 दिन पहले से ही होली खेलना शुरू हो जाता है। यहां भक्त जमकर होली खेलते हैं। होली के अवसर पर रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजाया जाता है। 29 फरवरी को ठाकुरजी की राजभोग आरती के बाद भक्त और भगवान के बीच जमकर होली हुई। सेवायत गोस्वामियों ने देश-विदेश से आए भक्तों पर प्रसादी गुलाल बरसाया और फल और मिठाई भी बांटी। यहां कई दिनों तक होली खेली जाती है।

होलिका दहन पर फूल वाली होली खेली जाती है

होली का त्योहार केवल रंगों का ही नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत का भी प्रमाण है। भगवान विष्णु के प्रिय भक्त- श्री प्रह्लाद जी, भक्ति की ताकत का प्रमाण देते हैं। होलिका दहन के दिन, वृंदावन में फूल वाली होली मनाई जाती है। जुलूस के बाद शाम को होलिका दहन का समय आता है। वृंदावन की होली रंगीन पानी और गुलाल से खेली जाती है, जो फूलों और केसर जैसे जैविक पदार्थों का उपयोग करके बनाया जाता है। गोस्वामी जन- फूल, बाल्टी, रंगों के थाल, पानी की पिचकारियां, आदि का उपयोग करके, ठाकुर जी की तरफ से सभी भक्तों पर रंग छिड़कते हैं। लोग रंगों का आनंद लेते हुए धुनों पर नाचते गाते रहते हैं।

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