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Holi 2025: होली के त्योहार में आखिर रंग खेलने की परंपरा कैसे शुरू हुई? यहां जानें पूरी कहानी

Holi 2025: होली 2025 का त्योहार 14 मार्च को मनाया जाएगा, जो प्रेम, उल्लास और भाईचारे का प्रतीक है। इसकी शुरुआत होलिका दहन से होती है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत दर्शाता है। रंगों वाली होली की परंपरा श्रीकृष्ण और राधा से जुड़ी है, जिसे आज भी ब्रज में अनूठी होली उत्सवों—लट्ठमार, फूलों और गुलाल की होली के रूप में मनाया जाता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 03, 2025 पर 5:54 PM
Holi 2025: होली के त्योहार में आखिर रंग खेलने की परंपरा कैसे शुरू हुई? यहां जानें पूरी कहानी
Holi 2025: रंगों वाली होली की शुरुआत कब और कैसे हुई?

केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि ये उत्सव है प्रेम, उल्लास और भाईचारे का। हर साल फाल्गुन पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला ये पर्व लोगों के जीवन में नई उमंग और ऊर्जा भर देता है। रंगों से सराबोर ये त्योहार समाज में हर तरह के भेदभाव को मिटाकर समानता संदेश देता है। इस दिन चारों ओर खुशियों की बौछार होती है, जब लोग गुलाल उड़ाकर, रंगों से खेलकर और मिठाइयों का आदान-प्रदान कर एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। होली की शुरुआत होलिका दहन से होती है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। अगले दिन धुलेंडी पर रंगों की बरसात होती है, जहां हर कोई मस्ती और हंसी-ठिठोली में डूब जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्रीकृष्ण और राधा के प्रेम से जुड़े इस पर्व की जड़ें ब्रजभूमि में हैं, जहां इसे अलग-अलग अनूठी परंपराओं के साथ मनाया जाता है।

होलिका दहन से होती है होली की शुरुआत

होली का शुभारंभ होलिका दहन से होता है, जिसे छोटी होली के रूप में मनाया जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन घर-घर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और अग्नि में नारियल, गेंहू की बालियां आदि अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इसके अगले दिन रंगों वाली होली खेली जाती है, जिसे धुलेंडी, फाग या रंग पंचमी भी कहा जाता है।

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