एलिजाबेथ II (Elizabeth II) 1952 में ब्रिटेन की महारानी बनी थीं। तब इंडिया को आजाद हुए सिर्फ 5 साल हुए थे। ब्रिटिश शासन के दौरान हुए अत्याचार को लोग भूल नहीं पाए थे। इसके बावजूद इंडिया आने पर हर बार ब्रिटेन की महारानी को लोगों का जबर्दस्त प्यार और स्नेह मिला था। बतौर महारानी अपने 70 साल के कार्यकाल में एलिजाबेथ द्वितीय तीन बार इंडिया आई थीं।
पहली बार वह राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आमंत्रण पर 1961 में इंडिया में आई थीं। उनके साथ उनके पति प्रिंस फिलिप भी थे। तब दोनों मुंबई, चेन्नई और कोलकाता गए थे। उन्होंने आगरा में ताजमहल का भी दीदार किया था। उन्होंने दिल्ली में महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की थीं। उन्होंने इंडिया में अपने जोरदार स्वागत पर खुशी जताई थीं। उन्होंने अपने भाषण में कहा था, "भारतीय लोगों का उत्साह और अतिथि सत्कार और भारत की समृद्धि और विविधता हमेशा हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत रही है।"
1961 में ब्रिटेन की महारानी इंडिया में गणतंत्र दिवस समारोह की मुख्य अतिथि के रूप में इंडिया आई थीं। तब जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे। महारानी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में हजारों लोगों को संबोधित किया था।
ब्रिटेन की महारानी दूसरी बार 1983 में इंडिया आई थीं। तब वह कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट मीटिंग (CHOGM) के लिए इंडिया आई थीं। उन्होंने मदर टेरेसा को 'ऑर्डर ऑफ द मेरिट' प्रदान किया था। अंतिम बार वह इंडिया के आजादी के 50 साल पूरे होने पर आयोजित समारोह में हिस्सा लेने के लिए 1997 में इंडिया आई थीं। इस दौरे में पहली पार उन्होंने औपनिवेशक काल को इतिहास का 'मुश्किल अध्याय' बताया था।
उन्होंने अपने भाषण में कहा था, "यह कोई सीक्रेट नहीं है कि हमारे इतिहास के कुछ मुश्किल अध्याय रहे हैं। जलियांवाला बाग इसका दुखद उदाहरण है।" महारानी और उनके पति अमृतसर में जालियांवाला बाग गए थे और वहां बने स्मारक को देखा था। उन्होंने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की थी। जालियांवाला बाग नरसंहार को ब्रिटिश राज पर काले धब्बे के रूप में देखा जाता था।
1919 में जालियांवाला बाग में ब्रिटिश पुलिस ने विदेशी शासन का विरोध कर रहे लोगों पर गोलियां चलाई थीं, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई थी। इस नरसंहार पर महारानी के माफी मांगने की मांग समय-समय पर इंडिया में होती रही है।
महारानी एलिजाबेथ के 70 साल के शासन में इंडिया के तीन राष्ट्रपतियों ने ब्रिटेन का दौरा किया था। सबसे पहले 1963 में डॉ. राधाकृष्णन ने ब्रिटेन का दौरा किया था। 1990 में आर वेंकटरमण ब्रिटेन गए थे। 2009 में प्रतिभा पाटिल ब्रिटेन गई थीं। महारानी ने बकिंघम पैलेस में पाटिल के अपने स्वागत भाषण में कहा था, "लंबे समय तक ब्रिटेन और इंडिया ने इतिहास को साझा किया है जो आज एक मजबूत नए पार्टनरशिप के लिए प्रेरणा का स्रोत है।"