IAS officer: पूजा खेडकर के बाद अब पूर्व आईएएस अधिकारी अभिषेक सिंह भी जांच के घेरे में, जानें क्यों उठ रहे हैं सवाल

IAS officer Abhishek Singh: विशेषाधिकारों के कथित दुरुपयोग को लेकर विवादों में घिरी ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर को दोषी पाए जाने पर सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है। वर्ष 2023 बैच की IAS अधिकारी खेडकर पर सिविल सर्विस में शामिल होने के लिए शारीरिक दिव्यांगता कैटेगरी और OBC कोटा के तहत लाभों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है

अपडेटेड Jul 15, 2024 पर 4:22 PM
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IAS officer Abhishek Singh: अभिषेक सिंह 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं

IAS officer Abhishek Singh: सिविल सेवा परीक्षा पास करने के लिए फर्जी दिव्यांगता और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करने की आरोपी IAS अधिकारी पूजा खेडकर के खिलाफ संघ लोक सेवा आयोग ने जांच शुरू कर दी है। विशेषाधिकारों के कथित दुरुपयोग को लेकर विवादों में घिरी ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर को दोषी पाए जाने पर सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है। यदि यह पाया जाता है कि उन्होंने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया है या यह पाया जाता है कि उनका चयन जिन दस्तावेजों के आधार पर किया गया है, उनमें किसी तरह का फर्जीवाड़ा है तो उन्हें आपराधिक आरोपों का भी सामना करना पड़ सकता है।

साल 2023 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी खेडकर ट्रेनी हैं और वर्तमान में अपने गृह कैडर महाराष्ट्र में तैनात हैं। इसी बीच एक और पूर्व आईएएस अधिकारी से जुड़ी ऐसी ही घटना सामने आई है। ये आईएएस अधिकारी हैं अभिषेक सिंह...।

अभिषेक सिंह 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। सिंह ने पिछले साल एक्टर बनने के लिए पद से इस्तीफा दे दिया था। सोशल मीडिया पर उनके डांस और जिम के वीडियो वायरल होने के बाद वह जांच के घेरे में हैं। उनका चयन विकलांगता मानदंड के तहत हुआ था।


अभिषेक सिंह ने यूपीएससी चयन प्रक्रिया में रियायतें पाने के लिए चलने-फिरने में अक्षम होने का दावा किया था। कई यूजर्स ने विकलांग कैटेगरी में उनके चयन पर सवाल उठाए हैं और नौकरशाही चयन प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।

अभिषेक सिंह ने किया बचाव

इन आरोपों का जवाब देते हुए सिंह ने कहा कि कथित तौर आरक्षण का समर्थन करने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, "जबसे मैंने आरक्षण के पक्ष में आवाज उठाना शुरू किया है, आरक्षण विरोधियों की पूरी सेना ने सब काम छोड़कर मुझपे मोर्चा खोल दिया है। उनको यह बात हजम नहीं हो रही कि एक जनरल कैटेगरी का लड़का आरक्षण के पक्ष में कैसे बोल रहा है?"

सिंह ने लिखा, "पहले तो आपने मेरी कास्ट पर ही सवाल उठाया और कहा कि मैं झूठा सिंह हूं, फिर आपने कहा कि मैं अपनी नौकरी वापिस मांग रहा हूं, और अब कह रहे हैं कि मैंने नौकरी आरक्षण से ली है। मैं आपसे बड़ी विनम्रता पूर्वक एक बात कहना चाहता हूं। अभिषेक सिंह अपने पुरुषार्थ, कर्मठता और साहस के लिए जाना जाता है। किसी की कृपा के लिए नहीं। मैंने अपने जीवन में जो कुछ हासिल किया है अपने दम पर हासिल किया है, किसी आरक्षण के दम पर नहीं।"

पूर्व IAS अधिकारी ने कहा, "देश की सर्वोच्च सेवा में सेलेक्शन लेना, उसमें निर्भीक निडर बिना किसी का दबाव माने ईमानदारी से कार्य करना, और अपनी मर्जी से उसे छोड़ दोबारा शून्य से शुरुआत करना। जब भविष्य अंधकार में छुपा हो तब भी उसमें सूरज ढूंढने का हौसला लिए, आंखों में अनगिनत सपने लिए, अपने दम पर आगे बढ़ जाना, साहब इसके लिए चट्टान का कलेजा चाहिए।"

उन्होंने कहा, "आपने ये कहा कि मेरे पिताजी IPS अधिकारी थे इसलिए मुझे फायदा मिला। आपको बता दूं, मेरे पिताजी एक बहुत गरीब परिवेश से निकलकर PPS अधिकारी बने, IPS में प्रमोट हुए थे। उनकी 3 सन्तानें हैं, यानी मेरी एक छोटी बहन और एक छोटा भाई। उन्होंने भी UPSC की तैयारी करी पर सेलेक्शन नहीं हो सका। इसके अलावा मेरे 7 और कजिंस ने प्रयास किया, कई कर भी रहे हैं, अभी तक किसी का भी सेलेक्शन नहीं हो सका है। अपने पूरे खानदान में मैं इकलौता IAS में चयनित हुआ।"

सिंह ने कहा, "आपको ये भी बता दूं कि UPSC में कोई डोमिसाइल सर्टिफिकेट नहीं लगता। जिसने भी UPSC दिया है उसको पता होगा। तो ये फर्जी प्रॉपगैंडा बंद करें। जिसको जो भी पूछना है मैं जवाब देने के लिए तैयार हूं। मुझे जो ठीक लगता है मैं करता हूं, और आगे भी करता रहूंगा। कला और समाज सेवा मेरी रुचि है और मैं इसमें लगातार प्रयासरत हूं। हां मैं ये मानता हूं कि दोनों ही फील्ड में मैं ज़्यादा कुछ नहीं कर पाया हूं, पर मैं हारा नहीं हूं। रोज़ सुबह उठकर मैं पूरी निष्ठा से मेहनत करता हूं, और तब तक करता रहूंगा जब तक सफल नहीं हो जाता। मैं कभी मैदान छोड़कर नहीं भागूंगा।"

कौन हैं अभिषेक सिंह?

अभिषेक सिंह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। नवंबर 2022 में वह तब चर्चा में आए थे, जब चुनाव आयोग ने उन्हें गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए जनरल ऑब्जर्वर के पद से हटा दिया था। ऐसा इसलिए किया गया था, क्योंकि उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने आधिकारिक कार के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट करके "पब्लिसिटी स्टंट" किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2015 में सिंह को दिल्ली सरकार में तीन साल के लिए प्रतिनियुक्ति दी गई थी, जिसे 2018 में दो साल के लिए बढ़ा दिया गया था।

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मेडिकल लीव के कारण उन्हें 2020 में अपने मूल कैडर उत्तर प्रदेश वापस भेज दिया गया था। उन्होंने लंबे समय तक यूपी में ड्यूटी ज्वाइन नहीं की। सिंह ने अभिनय में भी हाथ आजमाया और नेटफ्लिक्स की एक सीरीज Delhi Crime, शॉर्ट फिल्म Chaar Pandrah और बी प्राक के म्यूजिक वीडियो Dil Tod Ke... में नजर आए। उत्तर प्रदेश के जौनपुर से ताल्लुक रखने वाली उनकी पत्नी दुर्गा शक्ति नागपाल बांदा जिले की जिला मजिस्ट्रेट हैं।

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