Indian Map: भारत के मैप में श्रीलंका दिखाया जाता है, चीन या पाकिस्तान क्यों नहीं? जानिए वजह

Indian Map: भारत के मैप में हमेशा श्रीलंका जुड़ा हुआ नजर आता है। अब सवाल उठता है कि जब भारत और श्रीलंका, दोनों अलग-अलग देश हैं तो फिर भारत के मैप में श्रीलंका को भी क्यों दिखाया जाता है? मैप में कभी भी पाकिस्तान, भूटान, चीन आदि को नहीं दिखाया जाता है। कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है

अपडेटेड Oct 02, 2023 पर 4:01 PM
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Indian Map: भारतीय मैप में श्रीलंका को दिखाने के पीछे एक समुद्री कानून है। अगर भारतीय नक्शे में श्रीलंका को नहीं दिखाया जाता तो यह कानूनन अपराध माना जाएगा।

Indian Map: आपने बचपन से लेकर आज तक जब भी भारत का मैप देखा होगा तो उसमें आपको भारत के साथ-साथ श्रीलंका जरूर दिखाई दिया होगा। ऐसा नहीं है कि वह भारत के नजदीक है। उससे भी बहुत ज्यादा नजदीक भारत से पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन और अन्य देश भी हैं। लेकिन भारत के नक्शे के साथ इन्हें कभी नहीं दिखाया जाता है। कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? ऐसा नहीं है कि श्रीलंका से हमारे अच्छे संबंध है तो इसे भारत के नक्शे में दिखाए जाने से कुछ दिक्कत नहीं होती है जबकि इसके पीछे एक अहम वजह है।

किसी विशेष कारण की वजह से श्रीलंका को भारत के मैप दिखाया जाता है। दरअसल, भारतीय मैप में श्रीलंका को दिखाने के पीछे की वजह एक समुद्री कानून है। अगर भारतीय नक्शे में श्रीलंका को नहीं दिखाया जाता तो यह कानूनन अपराध माना जाएगा। यही वजह है कि हर भारतीय नक्शे में श्रीलंका को जरूर दिखाया जाता है।

इस वजह से भारत के मैप में श्रीलंका को दिखाया जाता है


यूनाइटेड नेशन का एक कानून है। जिसे लॉ ऑफ सी (Law of Sea) कहा जाता है। इस कानून के मुताबिक अगर किसी देश की सीमा समुद्र से लगती है तो सीमा से 200 नॉटिकल माइल यानी 370 किलोमीटर तक का इलाका उस देश का समुद्री इलाका माना जाता है। अब श्रीलंका और भारत के बीच की दूरी सिर्फ 18 नॉटिकल माइल है। यही कारण है कि श्रीलंका को भारत के मैप में दिखाया जाता है। सीधे शब्दों में समझें तो अगर कोई देश समुद्र के किनारे बसा हुआ है या फिर उसका एक हिस्सा समुद्र से जुड़ा है तो इस स्थिति में उस देश के नक्शे में देश की सीमा से आस-पास का क्षेत्र भी नक्शे में दिखाया जाएगा।

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क्यों बना था यह कानून?

साल 1956 में जब संयुक्त राष्ट्र की तरफ से यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑफ द लॉ ऑफ द सी का आयोजन किया गया तब इस सम्मेलन में कई देश शामिल हुए थे. इस दौरान समुद्री सीमाओं को लेकर और उससे जुड़ी संधियों और समझौतों पर गहन चर्चा हुई थी। इसके बाद 1982 तक तीन सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें समुद्र से जुड़े कानूनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने का काम किया गया।

इस दौरान कई समुद्री अंतरराष्ट्रीय कानूनों को मान्यता दी गई थी। जिसमें से एक कानून लॉ ऑफ द सी भी था। इसके तहत किसी भी देश के नक्शे में उस देश की बेसलाइन से 200 नॉटिकल माइल तक की सीमा को दिखाना अनिवार्य बताया गया है।

भारत से कितना दूर है श्रीलंका?

भारत से श्रीलंका की दूरी की बात करें तो भारत के धनुषकोडी से श्रीलंका की दूरी 18 मील ही है। इससे साफ हो जाता है कि भारत के नक्शे में इस वजह से श्रीलंका अहम स्थान रखता है। यही कारण है कि इस पर कोई विवाद भी नहीं होता है। इसी नियम का पालन अन्य समुद्री भी करते हैं।

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