Indian Railway: भारतीय रेलवे को देश की लाइफ लाइन कहा जाता है। इसलिए इससे जुड़े नियमों का हम सभी को पालन करना चाहिए। जितना यात्रियों के लिए नियम बनाए गए हैं। उतना ही रेलवे में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी नियम बनाए गए हैं। ऐसे में ट्रेन को चलाने वाले लोको पायलट को हर बार ट्रेन चलाने से पहले एक टेस्ट से गुजरना होता है। इस टेस्ट को पास करने के बाद ही उन्हें ट्रेन चलाने की मंजूरी मिलती है। ट्रेन में लोको पायलट का अहम योगदान होता है। बिना इसके ट्रेन हिल भी नहीं सकती है।
दरअसल, लोको पायलट एक ट्रेन को कई सौ किलोमीटर लेकर जाते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं लोको पायलट का ट्रेन में क्या क्या काम होता है और हर बार ड्यूटी पर आने से पहले उन्हें कुछ बातों का ध्यान रखना होता है। जिसके बाद ही वो ट्रेन में बैठ सकते हैं।
ट्रेन चलाने से पहले लोको पायलट का टेस्ट
दरअसल, जब भी कोई लोको पायलट ट्रेन ले जाने के लिए तैयार होते हैं तो उन्हें कई तरह की औपचारिकताएं पूरी करनी होती है। सबसे पहले लोको पायलट को अपनी अटेंडेंस से जुड़े काम करना होता है। इसके बाद उन्हे जिस ट्रेन को ले जाना है। उसके बारे में जानकारी दी जाती है। इसके अलावा उन्हें ट्रेन के रूट मैप आदि की पूरी जानकारी मुहैया करा दी जाती है। इसके बाद उनका एल्कोहोल का टेस्ट (Breathalyzer test) होता है। उन्हें एक मशीन में फूंक मारकर टेस्ट करवाना होता है ताकि कोई भी व्यक्ति शराब पीकर ट्रेन में ना चढ़ें। इस टेस्ट में पास होने के बाद ही लोको पायलट को ट्रेन का इंजन शुरू करने की इजाजत मिलती है। नियम के अनुसार ड्यूटी ज्वाइन करने से आठ घंटे पहले ड्रिंक नहीं करनी चाहिए।
टेस्ट में फेल होने पर हो सकती है कार्रवाई
अगर कोई लोकोपायलट ऑन ड्यूटी ड्रिंक करता है और ब्रेथ इनलाइजर टेस्ट एल्कोहल पाया जाता है तो यूरिन और ब्लड की जांच कराई जा सकती है। रिपोर्ट तय मानकों के अनुसार नहीं आने पर लोको पायलट को चार्जशीट दे दी जा सकती है। इसके साथ ही कार्रवाई हो सकती है।