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Indian Railways: ट्रेन में सफर के दौरान महिलाओं को मिलते हैं ये अधिकार, जानिए पूरी डिटेल

Indian Railway Women Rights: भारतीय रेलवे की ओर महिलाओं को ट्रेन में सफर के दौरान कई तरह के अधिकार मिलते हैं। लेकिन ये अधिकार कुछ नियम और शर्तों के साथ जुड़े हुए हैं। जिसमें महिला अगर बिना टिकट के अकेले सफर कर रही है तो TTE उसे बोगी से बाहर नहीं कर सकते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 14, 2024 पर 3:55 PM
Indian Railways: ट्रेन में सफर के दौरान महिलाओं को मिलते हैं ये अधिकार, जानिए पूरी डिटेल
Indian Railways: हर पैसेंजर ट्रेन में महिलाओं के लिए एक बोगी आरक्षित होती है।

Indian Railways: जब भी आप भारतीय रेलवे में सफर करते हैं तो अपने अधिकारों और रेलवे के नियमों के बारे में जानना बेहद जरूरी होता है। रेलवे ने आम यात्रियों के लिए कई ऐसे नियम बनाएं हैं। जिससे लोगों का सफर आसान हो जाता है। ऐसे ही रेलवे ने महिलाओं के लिए भी कई नियम बनाएं हैं। जिसमें महिलाएं अगर अकेले सफर कर रही हैं, टिकट नहीं ले सकीं है तो किस तरह के अधिकार मिलते हैं। ऐसे कई नियम बनाए गए हैं। ये ऐसे अधिकार हैं, जो आम लोगों को बिल्कुल भी नहीं मालूम है। लिहाजा इन नियमों के बारे में जानना बेहद जरूरी है।

रेल में 45 साल के ऊपर की महिलाओं को लेडीज कोटा में प्राथमिकता मिलती है। इसके साथ ही इन महिलाओं के साथ 3 साल तक का बच्चा भी ट्रेवल कर सकता है। उसको आपके साथ लेडीज कोटा में ही रखा जाएगा। पहले यह सुविधा सिर्फ स्लीपर क्लास में थी, लेकिन अब यह एसी में भी है।

ट्रेन में सफर के दौरान महिलाओं को मिलते हैं ये अधिकार

ट्रेन में रिजर्वेशन नहीं होने पर या बिना टिकट यात्रा करने पर महिलाओं को ट्रेन से TTE नहीं उतार सकते हैं। इंडियन रेलवे के कानून के मुताबिक कुछ शर्तों के साथ महिला को यात्रा जारी (Train Journey) रखने की इजाजत दी गई है। इसके साथ ही ट्रेन में अगर महिला अकेली सफर कर रही हैं तो वह टीटीई से बोलकर वह अपनी सीट में बदलाव करा सकती हैं। ट्रेन में अकेले सफर कर रही महिलाओं को कई और अधिकार मिले हुए हैं। वहीं महिला यात्री अगर ट्रेन में यात्रा कर रही हैं और टिकट नहीं है, तब ऐसी स्थिति में टीटीई उसे ट्रेन की बॉगी से बाहर नहीं निकाल सकते हैं। टीटीई महिला से अगले स्टेशन में टिकट लेने की अपील कर सकते हैं। अगर महिला के पास पैसे नहीं हैं तो उस पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं डाल सकते हैं। यह कानून साल 1989 में बनाया गया था।

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