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Inspiring Story: रोचक और प्रेरणादायक है इस पुलिस अधिकारी के सफलता की कहानी, पढ़ते ही मिलेगी टॉनिक

Inspiring Story: बड़ी-बड़ी कंपनियों की अच्छी खासी नौकरी छोड़कर कुछ बड़ा करने का सपना लिए हुए गौरव शर्मा अपने जीवन को पूरी तरह से परिवर्तित कर चुके थे। लेकिन लगातार असफलता ने पूरे आत्मविश्वास को झकझोर कर रख दिया था। लेकिन वो कहते हैं न कि पूरे मन से प्रयास किया गया कार्य सफलता के मार्ग को बड़े ही शानदार तरीके से मजबूत बना देती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 24, 2024 पर 5:03 PM
Inspiring Story: रोचक और प्रेरणादायक है इस पुलिस अधिकारी के सफलता की कहानी, पढ़ते ही मिलेगी टॉनिक
Inspiring Story: गौरव कुमार शर्मा बलिया के क्षेत्राधिकार नगर (CO CITY) के पोस्ट पर कार्यरत हैं

Inspiring Story: सनन्दन उपाध्याय/बलिया: अगर आप भी कोई बड़ा ख्वाब लिए हुए IAS-IPS की तैयारी कर रहे हो, तो इस पुलिस अधिकारी की कहानी पढ़ना न भूले। कुछ कर जाने का जोश, जुनून और जज्बा के रूप में युवाओं के लिए इस पुलिस अधिकारी की सफल कहानी किसी टॉनिक से कम नहीं है। बड़ी-बड़ी कंपनियों की अच्छी खासी नौकरी छोड़कर कुछ बड़ा करने का सपना लिए हुए गौरव शर्मा अपने जीवन को पूरी तरह से परिवर्तित कर चुके थे। लेकिन लगातार असफलता ने पूरे आत्मविश्वास को झकझोर कर रख दिया था। लेकिन वो कहते हैं न कि पूरे मन से प्रयास किया गया कार्य सफलता के मार्ग को बड़े ही शानदार तरीके से मजबूत बना देती है।

बलिया के सीओ सिटी गौरव शर्मा की सफल कहानी गजब की रोचक और प्रेरणादायक है। आइए विस्तार से जानते हैं उनके बारे में... गौरव कुमार शर्मा ने 'लोकल 18' को बताया कि मैं बलिया के क्षेत्राधिकार नगर (CO CITY) के पोस्ट पर कार्यरत हूं। मैं लखनऊ का मूल निवासी हूं। हर किसी की भांति मेरी भी पढ़ाई की शुरुआत प्राथमिक विद्यालय से हुई। इस पद को पाने के लिए जीवन में मैंने जो अनुभव किया वह आज भी मेरे मन में जीवंत है।

कई प्राइवेट कंपनियों में की नौकरी

प्राथमिक विद्यालय के पढ़ाई के बाद गौरव कुमार शर्मा के पिताजी का ट्रांसफर लखनऊ हो गया। इसके बाद वह परिवार के साथ लखनऊ चले गए। उन्होंने बताया कि वहां से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई हुई। इसके बाद चेन्नई से बीटेक किया। बीटेक करने के बाद मैं विप्रो संस्था से जुड़ा। शर्मा ने बताया कि मैंने लगभग 3 साल नौकरी किया। इसके बाद मैं टीसीएस में सलेक्ट हुआ। यहां भी लगभग डेढ़ 2 साल काम किया। उन्होंने कहा कि दिमाग में हमेशा यह चलता रहता था कि एक बार सिविल सेवा सर्विस के लिए बैठना है, लेकिन जॉब के समय वक्त नहीं मिल पाता था। यह ऐसी नौकरी थी कि स्विफ्ट चेंज होता रहता था कभी नाइट तो कभी मॉर्निंग लग जाती थी। इस कारण तैयारी नहीं हो पाती थी।

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