Seasons of Japan: मौसम की जब भी बात आत है तो हर कोई इसके बारे में जानने की कोशिश करता है। जैसे ही मौसम विभाग ने कह दिया है कि आज यहां बारिश होगी तो लोग फौरन अपने इलाके के बारे में जानने की कोशिश में जुट जाते हैं। वैसे तो आमतौर पर मालूम है कि गर्मी बारिश और ठंड का मौसम हर साल आता है। दुनिया भर में 4 तरह का मौसम माना गया है। वहीं भारत में 6 तरह का मौसम होता है। लेकिन आज हम बात कर रहे हैं जापान की। यहां 72 तरह का मौसम होता है। आम आदमी के लिए यह किसी आश्चर्य से कम नहीं है।
दरअसल, भारत में 6 तरह की ऋतुएं होती हैं। जिसमें बसंत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु, शरद ऋतु, हेमंत ऋतु और शिशिर ऋतुएं शामिल हैं। लेकिन जापान में एक नहीं, दो नहीं बल्कि 72 तरह का मौसम होता है। यहां हर पल मौसम करवट लेता रहता है।
जापान में हर 5 दिन में बदलता है मौसम
जापान दुनियाभर में अपने टेक्नोलॉजी, साफ सफाई और व्यवस्था के लिए जाना जाता है। वहीं दूसरी ओर ये देश बदलते मौसम के लिए भी जाना जाता है। बता दें कि सामान्य तौर पर जापान में 4 ही मौसम होते हैं। सर्दी, गर्मी, बरसात और बसंत का मौसम है। लेकिन फिर भी इन चार मौसमों में शामिल हर मौसम को यहां 6 हिस्सों में बांट दिया जाता है। इस तरह हर मौसम में 24 सेक्की बनते हैं। जिनमें से हर सेक्की 15 दिन लंबा होता है। ये पीरियड प्राचीन चीनी ल्यूनीसोलर कैलेंडर पर आधारित है। इस तरह इन सेक्की को 3 'को' में बांट दिया जाता है। इस तरह जापान में कुल 72 'को' बनते हैं। को का मतलब माइक्रोसीजन से है। यह 5 दिन का होता है।
जानिए माइक्रोसीजन के मायने
जापान के ये माइक्रोसीजन गेहूं पकने, अंकुर फूटने, फसल लगाने, फूल खिलने जैसी प्राकृतिक घटनाओं को प्रदर्शित करते हैं। अब सवाल ये है कि जापान में इतनी ऋतुएं कैसे बनाई गईं। इसके लिए बता दें कि छठी सदी में जापान की ये छोटी-छोटी ऋतुएं मध्य कोरिया से ली गई थी। वहीं, इनके नामों को उत्तरी चीन की जलवायु से लिया गया था। जिसे 1685 में खगोलशास्त्री शिबुकावा शुनकाई ने जापान की जलवायु के रूप में ढाल लिया था।
हालांकि मॉडलाइजेशन को देखते हुए सरकार ने इस 72 ऋतुओं वाले पारंपरिक कैलेंडर को ग्रेगोरियन कैलेंडर में बदल दिया था। अब भी जापान के कुछ ग्रामीण किसान और मछुआरे इस पारंपरिक कैलेंडर को ही मानते हैं।