लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के चेयरमैन एस एन सुब्रमण्यन एक बार फिर चर्चाओं में हैं, क्योंकि उन्होंने इस बार वर्क फ्रॉम होम कल्चर को लेकर एक और बयान दिया है। उन्होंने खासकर टेक इंडस्ट्री को लेकर ये बात कही। उन्होंने कहा कि अगर आप किसी IT कर्मचारी को ऑफिस आकर काम करने के लिए कहते हैं, तो वह टाटा बाय-बाय कह जाता है। हाल ही में सुब्रमण्यन तब विवादों में घिरे थे, जब उन्होंने हफ्ते में 90 घंटे काम करने की वकालत की थी।
सुब्रमण्यन ने मंगलवार को चेन्नई में CII के मिस्टिक साउथ ग्लोबल लिंकेज समिट 2025 में बोलते हुए कहा, “जब मैं 1983 में L&T में शामिल हुआ, तो मेरे बॉस ने कहा, अगर तुम चेन्नई से हो, तो तुम दिल्ली जाओ और काम करो। आज, अगर मैं चेन्नई से किसी लड़के को ले जाऊं और उसे दिल्ली जाकर काम करने के लिए कहूं, तो वह अलविदा कह देता है।''
उन्होंने कहा कि ट्रांसफर नहीं होने की इच्छा IT सेक्टर में और भी ज्यादा साफ है, जहां कर्मचारी दफ्तर में लौटने के बजाय दूर से काम करना पसंद करते हैं।
ET की एक रिपोर्ट के अनुसार, L&T चीफ ने कहा, "अगर आप उसे (आईटी कर्मचारी को) ऑफिस आकर काम करने के लिए कहते हैं, तो वह अलविदा कह देता है। और वो पूरी तरह से एक अलग दुनिया है। इसलिए, यह एक अजीब दुनिया है, जिसमें हम रहने की कोशिश कर रहे हैं और हममें से कई लोग थोड़े ज्यादा सफेद बाल पहनकर इसे समझने की कोशिश कर रहे हैं। हमें यह देखना होगा कि इस दुनिया के साथ कैसे रहना है और ऐसी नीतियां बनानी होंगी जो इन सबको समझने और इसे आगे बढ़ाने के लिए फ्लेक्सिबल हों।"
उन्होंने यह भी कहा कि लेबर अवसरों की तलाश में आगे बढ़ने को तैयार नहीं हैं।
उन्होंने कहा, “लेबर मौकों की तलाश में जाने को तैयार नहीं है। हो सकता है कि उनकी स्थानीय अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही हो, हो सकता है कि यह अलग-अलग सरकारी योजनाओं के कारण हो।'' उन्होंने आगे कहा कि श्रमिकों की कमी का असर भारत के बुनियादी ढांचे के निर्माण पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री के लिए लेबर को हायर करना मुश्किल है, क्योंकि वे आराम को प्राथमिकता देता हैं और अपने होम टाउन से बाहर नहीं जाना चाहते।
सुब्रमण्यन ने कहा कि MGNREGA, JAN DHAN खाते और डायरेक्ट बेनिफिट्स ट्रासफर जैसी योजनाओं ने शायद लेबर व्यवस्था को प्रभावित किया है।
L&T प्रमुख को हाल ही में 90 घंटे के वर्किंग वीक की अपनी टिप्पणी के बाद भारी सार्वजनिक आक्रोश का सामना करना पड़ा, जिसने ऐसी मांगों की स्थिरता और व्यक्तिगत जीवन पर प्रभाव के बारे में वर्कफोर्स के बीच बढ़ती चिंता को उजागर किया। उन्होंने वर्कर्स के लिए रविवार समेत 90 घंटे के वर्क वीक के प्रस्ताव का सुझाव दिया।