Laungi Bhuiyan: पढ़िए, Canal Man के नाम से मशहूर लौंगी भुइयां के संघर्ष की कहानी, अकेले नगर बनाकर गांवों तक पहुंचा रहे हैं पानी

‘माउंनटेन मैन’ दशरथ मांझी की तरह 30 साल में इन्होंने 3 किलोमीटर नगर की खुदाई कर डाली

अपडेटेड Dec 15, 2021 पर 2:20 PM
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5 गावों को पानी पहुंचाने के लिए दूसरी नहर को तैयार करने में जुट गए हैं (ANI)

बिहार के गया जिले में स्थित बांकेबाजार प्रखंड की लुटुआ पंचायत के कोठीलवा गांव निवासी लौंगी भुईयां (Laungi Bhuiyan) 30 सालों में अकेले पहाड़ से जमीन तक 3 किलोमीटर लंबी नहर बनाकर मिसाल कायम कर चुके हैं। ‘माउंनटेन मैन’ दशरथ मांझी की तरह 30 साल में इन्होंने 3 किलोमीटर लंबी, 4 फीट चौड़ी एवं 3 फीट गहरी नगर की खुदाई कर डाली। इसका मकसद गया के लहथुआ इलाके के कोठीलावा गांव के आसपास की पहाड़ियों से बारिश के पानी को अपने खेतों में पहुंचाना था।

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इस नहर के सहारे बारिश के पानी को गांव में बने तालाब में स्टोर किया जाता है, जहां से लोग पानी का सिंचाई के लिए उपयोग करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 3 गांव के 3000 हजार लोग इससे लाभान्वित हो रहे हैं। पिछले साल भुइयां को महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने उनके काम से प्रभावित होकर ट्रैक्टर गिफ्ट किया था।


फिर बड़ा धमाका करने को तैयार भुइयां

'कैनाल मैन' (Canal Man) के नाम से मशहूर लौंगी भुइयां अब एक बार फिर आसपास के 5 गावों को पानी पहुंचाने के लिए दूसरी नहर को तैयार करने में जुट गए हैं। भुइयां अब दूसरी नहर खोदना चाहता है ताकि पहाड़ों से बारिश का पानी गया के पांच गांवों में लाया जा सके। जिन पांच गांव को पानी पहुंचेगा वहां के लोगों में खुशी है। लोग लौंगी भुइयां के जज्बे को सलाम कर रहे हैं।

लौंगी भुइयां ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा कि दूसरी नहर जो मैं अभी खोद रहा हूं, उससे आसपास के 5 गांवों के खेतों को पानी मिलेगा और खेती हो सकेगी जिससे इस क्षेत्र की गरीबी दूर होगी। उन्होंने कहा कि इस नहर में मछली पालन भी हो सकेगा।

पलायन रोकने के लिए उठाया कदम

उन्होंने कहा कि मैंने खुद ही नहर खोदने का फैसला किया और मुझे पूरा यकीन है कि इन 5 गांवों में पानी जल्द पहुंच जाएगा। लौंगी भुइयां को गांव के युवाओं को पत्नी एवं बच्चों को घर में छोड़कर परदेस कमाने जाना सहन नहीं हो सका।

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इसके बाद उन्हें यह ख्याल आया कि अगर गांव तक पानी आ जाए तो लोगों का पलायन रुक जाएगा और लोग खेतों में सभी तरह के फसल उगाने लगेंगे। वे बताते हैं कि 30 साल पहले उन्होंने पलायन से दुखी होकर नगर खोदने का फैसला किया। उन्होंने देखा कि जहां मवेशी पानी पीने जाते हैं वहां पर बहुत बड़ा जल का स्रोत है।

30 साल बाद रंग लाई मेहनत

उन्हें लगा कि यहां से पईन की खुदाई करके खेत तक पानी ले जाया जाए। आखिरकार 30 साल बाद उनकी मेहनत रंग लाई और 3 किलोमीटर लंबी नहर जो 4 फीट चौड़ी और 3 फीट गहरी है पूरी तरह तैयार हो गई।

लौंगी कहते हैं कि वे अकेले हाथ में कुदाल, खंती और टांगी लेकर निकल पड़ते थे। जब खुदाई शुरू की तब लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। कई लोग तो उन्हें पागल कहने लगे, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की।

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