Cryptocurrency Bill: 15 दिसंबर यानी आज होने वाली कैबिनेट की बैठक के एजेंडे में क्रिप्टोकरेंसी संबंधी विधेयक नहीं है। सूत्रों ने कहा है 23 दिसंबर को समाप्त होने वाले शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में बहुप्रतीक्षित क्रिप्टोकरेंसी कानून पेश नहीं किया जाएगा। बिल का संसद के दोनों सदनों के एजेंडे में भी कोई जिक्र नहीं है।
CNBC-TV18 के मुताबिक, बिल पर अभी भी काम चल रहा है और 15 दिसंबर को संसद में इस पर चर्चा नहीं होगी, क्योंकि सरकार अभी भी नियामक प्रावधानों को अंतिम रूप दे रही है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार प्रस्तावित क्रिप्टोकरेंसी ढांचे में बदलाव पर विचार कर रही है। इसका मतलब है कि इसे संसद के शीतकालीन सत्र में योजना के अनुसार बिल पेश नहीं किया जाएगा।
पहले रिपोर्ट आई थी कि संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित विधेयक "क्रिप्टोकरेंसी एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक 2021" पेश कर सकती है, जिसमें निजी क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित करने तथा भारतीय रिजर्ब बैंक (RBI) द्वारा जारी डिजिटल करेंसी को विनियमित करने के लिए ढांचा तैयार करने की बात कही गई है।
इस विधेयक में रिजर्ब बैंक द्वारा जारी आधिकारिक डिजिटल करेंसी के सृजन के लिए एक सहायक ढांचा सृजित करने की बात कही गई है। इस प्रस्तावित विधेयक में भारत में सभी तरह की निजी क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित करने की बात कही गई है। हालांकि, इसमें कुछ अपवाद भी है, ताकि क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित प्रौद्योगिकी एवं इसके उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए।
भारत में अभी क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग के संबंध में न तो कोई प्रतिबंध है और न ही कोई नियमन की व्यवस्था है। इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की थी और संकेत दिया था कि इस मुद्दे से निपटने के लिए सख्त विनियमन संबंधी कदम उठाए जाएंगे।
पिछले सप्ताह वित्त मामलों पर संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष एवं भाजपा सांसद जयंत सिन्हा ने क्रिप्टो एक्सचेंजों, ब्लाकचेन एवं क्रिप्टो आस्ति परिषद (बीएसीसी) के प्रतिनिधियों एवं अन्य लोगों से मुलाकात की थी और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि क्रिप्टो करेंसी को प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए बल्कि इसका नियमन किया जाना चाहिए।
भारतीय रिजर्ब बैंक ने बार बार क्रिप्टोकरेंसी के खिलाफ सख्त विचार व्यक्त किए है। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी पिछले दिनों क्रिप्टोकरेंसी को अनुमति दिए जाने के खिलाफ सख्त विचार व्यक्त किए थे और कहा था कि ये किसी वित्तीय प्रणाली के लिए गंभीर खतरा है।