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Mahakumbh 2025: महाकुंभ में 150 महिलाएं बनीं नागा संन्यासी, 2 विदेशी भी शामिल, पारंपरिक विधि से ली दीक्षा

Mahakumbh 2025: महाकुंभ में विदेशी महिलाओं ने सनातन धर्म अपनाकर संन्यास लिया। गंगा स्नान और पिंडदान के बाद उन्हें नए नाम और भगवा वस्त्र दिए गए। कामाख्या गिरि, शिवानी भारती, और मोक्षता गिरि ने सांसारिक जीवन छोड़कर योग और वैदिक ज्ञान के प्रचार को अपना उद्देश्य बनाया

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 20, 2025 पर 11:41 AM
Mahakumbh 2025: महाकुंभ में 150 महिलाएं बनीं नागा संन्यासी, 2 विदेशी भी शामिल, पारंपरिक विधि से ली दीक्षा
Mahakumbh 2025: महाकुंभ में विदेशी महिलाओं का सन्यास दीक्षा

Mahakumbh 2025: महाकुंभ के पवित्र अवसर पर विदेशी महिलाओं ने सनातन धर्म अपनाकर अपने जीवन को आध्यात्मिकता के लिए समर्पित किया। इनमें कोग्नाक टाउन की मरियम, इटली के वेनिस की अंकिया, और नेपाल की मौक्षिता राय शामिल हैं। जूना अखाड़े ने पारंपरिक विधियों के अनुसार इन्हें संन्यास की दीक्षा दी। गंगा स्नान, मुंडन, और पिंडदान जैसे अनुष्ठानों के बाद इन्हें संन्यासिनी घोषित किया गया।मरियम अब "कामाख्या गिरि," अंकिया "शिवानी भारती," और मौक्षिता "मोक्षता गिरि" के नाम से जानी जाती हैं।

दीक्षा के बाद उन्होंने भगवा वस्त्र धारण किए और सांसारिक जीवन को त्याग दिया। इन महिलाओं ने योग और वैदिक ज्ञान के प्रचार-प्रसार को अपनी जीवन साधना का हिस्सा बनाया है।महाकुंभ में इन विदेशी महिलाओं की भागीदारी ने यह दिखाया कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है।

सांसारिक जीवन से वैराग्य का मार्ग

मरियम, जो पहले एक निजी स्कूल में शिक्षिका थीं, को संन्यास के बाद "कामाख्या गिरि" नाम मिला। वहीं, योग सिखाने वाली अंकिया अब "शिवानी भारती" के नाम से जानी जाती हैं। नेपाल की मौक्षिता राय को "मोक्षता गिरि" का नाम दिया गया। इन महिलाओं के साथ 150 अन्य महिलाओं ने भी वैराग्य धारण कर संन्यास का मार्ग अपनाया।

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