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Mahakumbh Mela 2025: महाकुंभ मेले में दौड़ेंगी 13000 ट्रेनें, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया ऐलान

Prayagraj Mahakumbh 2025: महाकुंभ मेले की शुरुआत 13 जनवरी 2025 को पौष पूर्णिमा के दिन से शुरू हो रहा है। वहीं इसका समापन 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि के दिन होगा। इस मौके पर इंडियन रेलवे ने 13,000 ट्रेनों को चलाने का फैसला किया है। रेलवे ने प्रयागराज में 5000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 09, 2024 पर 12:47 PM
Mahakumbh Mela 2025: महाकुंभ मेले में दौड़ेंगी 13000 ट्रेनें, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया ऐलान
Prayagraj Mahakumbh 2025: रेलवे ने बेहतर आवागमन के लिए 21 नए पुल बनाए गए हैं। यहां पहली बार मेमू ट्रेनें भी चलेंगी।

प्रयागराज में इस बार महाकुंभ को भव्य बनाने की तैयारी बड़े पैमाने पर चल रही है। हर एक विभाग पूरी तरह से तैयारी में जुटा है। इस बीच रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने महाकुंभ मेले में श्रद्धालुओं के बड़ा ऐलान किया है। वैष्णव ने कहा कि महाकुंभ मेले के दौरान 13,000 ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसमें 3000 विशेष ट्रेनें शामिल हैं। महाकुंभ 2025 में करीब डेढ़ करोड़ से दो करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की उम्‍मीद है। उनकी बेहतर आवाजाही के लिए इंडियन रेलवे ने बड़े पैमाने पर तैयारी की है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव रेलवे कामकाज का निरीक्षण करने आए थे।

वैष्णव ने प्रयागराज में गंगा ब्रिज का निरीक्षण किया। इसके साथ ही उन्होंने स्टेशन पर जो री-डेवलपमेंट का काम हुआ है उसका भी जायजा लिया। यहां रेलवे स्टेशन पर 12 नए फुटओवर ब्रिज बनाए गए हैं। इसके अलावा टोटल 23 परमानेंट होल्डिंग एरिया बने हैं। वहीं महाकुंभ के दौरान मोबाइल टिकटिंग का भी उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा QR कोड लगाए जाएंगे, जिससे टिकट को डायरेक्ट ऐप के जरिए डाउनलोड किया जा सके।

प्रयागराज में 5000 करोड़ से ज्यादा खर्च

महाकुंभ 2025 की तैयारियों पर रेलवे अकेले प्रयागराज में ही पिछले 2 साल में 5000 करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च कर चुका है। यह जानकारी प्रयागराज पहुंचे केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी है। प्रयागराज में 100 साल बाद गंगा नदी पर पुल बना है। इस पुल का पीएम मोदी उद्घाटन करेंगे। रेल मंत्री ने बताया कि 5 स्टेशनों में तैयारी की जायजा लिया है। इसमें इन स्टेशनों के होल्डिंग एरिया का निरीक्षण करना बाकी है। यहां श्रद्धालु बैठकर अपनी ट्रेन का इंतजार कर सकते हैं। उन्होंने आगे बताया कि होल्डिंग एरिया और टिकट में कलर कोडिंग का इस्तेमाल किया गया है। ताकि श्रद्धालु सही प्लेटफार्म पर पहुंच सकें और सही ट्रेन पकड़ सकें।

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