गर्मी में गहराएगा बिजली संकट! ग्रिड ऑपरेटर्स की चेतावनी- देशभर में बढ़ेगा पावर कट का खतरा

Power Cut: फरवरी-मार्च में ही भीषण गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं, जिससे आने वाले महीनों में बिजली संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। NLDC की रिपोर्ट के मुताबिक, मई-जून में बिजली की मांग 270 गीगावाट तक पहुंच सकती है, जिससे देशभर में बड़े पैमाने पर पावर कट होने की संभावना है

अपडेटेड Mar 17, 2025 पर 9:47 AM
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Power Cut: गर्मी के मौसम में अधिकतम बिजली की मांग 270 गीगावाट तक पहुंच सकती है

गर्मी का असर अभी से दिखने लगा है, और फरवरी-मार्च में ही सूरज के तेवर तीखे हो गए हैं। तापमान लगातार ऊपर चढ़ रहा है, जिससे लोग पहले ही पंखे, कूलर और एसी का सहारा लेने लगे हैं। लेकिन अगर आपको लग रहा है कि गर्मी की असली मार यही है, तो जरा रुकिए। असली चुनौती मई-जून में आने वाली है, जब बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती है। भारत के टॉप ग्रिड ऑपरेटर ने चेतावनी जारी की है कि इन महीनों में बिजली की भारी किल्लत हो सकती है, जिससे देशभर में पावर कट की समस्या गहरा सकती है।

ऐसे में, अगर समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो भीषण गर्मी के साथ बिजली संकट की दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है। क्या हम इसके लिए तैयार हैं? या फिर आने वाले दिनों में बिजली गुल होने पर गर्मी से और बेहाल होंगे?

बिजली की मांग में जबरदस्त उछाल


नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर (NLDC) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस साल मई-जून में बिजली की मांग 15 से 20 गीगावाट (GW) तक बढ़ने की संभावना है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मई में ये मांग सबसे ज्यादा होगी, जिससे सप्लाई बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन सकता है। पिछले साल की तुलना में इस साल मांग में भारी उछाल देखा जा सकता है, जिससे देश के पावर ग्रिड पर दबाव बढ़ेगा।

बिजली आपूर्ति में भारी कमी की आशंका

रिपोर्ट के मुताबिक, मई के महीने में बिजली की जरूरत पूरी नहीं हो पाने की लगभग एक-तिहाई संभावना है। वहीं, जून में ये कमी 20% तक हो सकती है। खासकर गैर-सौर ऊर्जा वाले घंटों में ये संकट और भी गहरा सकता है। आमतौर पर मई और जुलाई के बीच मांग और आपूर्ति में 15 गीगावाट से अधिक का अंतर देखा जाता है। इस साल भी स्थिति कुछ ऐसी ही रहने की संभावना है, जिससे पावर कट की समस्या बढ़ सकती है।

रिन्यूएबल एनर्जी अपनाने की जरूरत

गर्मी के मौसम में अधिकतम बिजली की मांग 270 गीगावाट तक पहुंच सकती है, जो पिछले साल की 250 गीगावाट मांग की तुलना में कहीं अधिक है। इस बढ़ती मांग को देखते हुए, रिपोर्ट में ये सिफारिश की गई है कि देश में रिन्यूएबल एनर्जी यानी सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों को तेजी से विकसित करने की जरूरत है। इसके अलावा, लोड शिफ्टिंग रणनीति अपनाकर बिजली की खपत को संतुलित किया जा सकता है।

कोयला आधारित संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने की सिफारिश

एनएलडीसी ने सुझाव दिया है कि बिजली संकट से निपटने के लिए, कोयला आधारित बिजली संयंत्रों की क्षमता में बढ़ोतरी की जानी चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की बेसलोड बिजली उत्पादन प्रणाली में कोयला संयंत्रों का प्रभुत्व है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इनकी उत्पादन क्षमता स्थिर बनी हुई है। नतीजा, ये बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने में असमर्थ हो सकते हैं। ऐसे में, बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के तहत इमरजेंसी पावर लागू करने की जरूरत हो सकती है।

मई-जून में बिजली कटौती तय

रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मई और जून के महीनों में देशभर में बिजली की भारी किल्लत हो सकती है। ये स्थिति विशेष रूप से उन क्षेत्रों में गंभीर हो सकती है, जहां गर्मी की वजह से बिजली की मांग काफी ज्यादा रहती है। पावर ग्रिड ऑपरेटर का मानना है कि बिना ठोस उपायों के, इन महीनों में बड़े पैमाने पर पावर कट देखने को मिल सकते हैं।

क्या कर सकते हैं उपाय?

बिजली की बचत करें – बिना जरूरत के पंखे, कूलर और एसी न चलाएं।

रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ाएं – सोलर पैनल और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाएं।

लोड शिफ्टिंग रणनीति अपनाएं – बिजली की खपत को नियंत्रित करने के लिए ऑफ-पीक आवर्स में उपयोग करें।

इमरजेंसी पावर बैकअप की व्यवस्था करें – इन्वर्टर और जनरेटर जैसी बैकअप सुविधाओं पर ध्यान दें।

सरकारी उपायों पर नजर रखें – सरकार और बिजली विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

आने वाले महीनों में बिजली संकट से बचने के लिए व्यक्तिगत और सरकारी स्तर पर उपाय करना बेहद जरूरी होगा। अगर सही कदम उठाए गए, तो इस संभावित बिजली संकट को काफी हद तक टाला जा सकता है।

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