Road Accidents in India: केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार (12 दिसंबर) को लोकसभा में कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को लेकर भारत का रिकॉर्ड इतना गंदा है कि उन्हें विश्व सम्मेलनों में मुंह छिपाना पड़ता है। उन्होंने सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब देते हुए कहा कि उनके मंत्रालय के तमाम प्रयासों के बावजूद सड़क हादसों में कमी नहीं आई, बल्कि इसमें वृद्धि हो गई। गडकरी ने भारत में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर गहरा खेद व्यक्त किया। उन्होंने स्वीकार किया कि पदभार ग्रहण करने के बाद से वे दुर्घटनाओं में मृत्यु दर को 50 प्रतिशत तक कम करने के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने में विफल रहे हैं।
पीटीआई के मुताबिक, गडकरी ने कहा, "जब तक समाज का सहयोग नहीं मिलेगा, मानवीय व्यवहार नहीं बदलेगा और कानून का डर नहीं होगा, तब तक सड़क हादसों पर अंकुश नहीं लगेगा।" उनके अनुसार, देश में सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि हर साल 1.7 लाख से अधिक लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हो जाती है।
गडकरी ने कहा, "इतने लोग न लड़ाई में मरते हैं, न कोविड में मरते हैं और न ही दंगे में मरते हैं।" उन्होंने कहा, "मैं विश्व सम्मेलनों में जाता हूं तो मुंह छिपाता हूं। (दुर्घटनाओं का) सबसे गंदा रिकॉर्ड हमारा है।"
उचित इलाज नहीं मिलने से मौत
केंद्रीय मंत्री ने सांसदों से कहा कि वे सड़क हादसों को रोकने के लिए अपने स्तर पर प्रयास करें। केंद्रीय मंत्री ने सभी सदस्यों से कहा कि परिवहन विभाग के सहयोग से स्कूलों आदि में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित करें। गडकरी के मुताबिक, नीति आयोग की रिपोर्ट है कि सड़क हादसों के शिकार 30 प्रतिशत लोगों की मौत जीवन रक्षक इलाज नहीं मिल पाने के कारण होती है।
गडकरी ने कहा, "इसलिए इलाज के लिए कैशलैस योजना लाई गई है। उत्तर प्रदेश में इस पायलट परियोजना की शुरुआत हो रही है, इसके बाद पूरे देश में लागू की जाएगी।" केंद्रीय मंत्री ने भारत में ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की सिस्टम में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा, "दुनिया में जहां आसानी से ड्राइविंग लाइसेंस मिलता है, उस देश का नाम भारत है। हम इसमें सुधार कर रहे हैं।" लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदस्यों से कहा कि वे सड़क हादसों को रोकने के लिए प्रयास करें और समाज को जागृत करने का काम करें।
44 फीसदी नेशनल हाईवे के प्रोजेक्ट पेंडिंग
इससे एक दिन पहले बुधवार को नितिन गडकरी ने राज्यसभा में कहा कि नेशनल हाईवे (NH) सहित 150 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 44 प्रतिशत से अधिक प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट विभिन्न कारणों से देरी हो रही हैं। मार्च 2024 में कुल 952 परियोजनाएं निर्माणाधीन थीं। इनमें से कुल 419 परियोजनाएं देरी से चल रही हैं।
उन्होंने आगे कहा कि एनएच परियोजनाओं में देरी के प्राथमिक कारण भूमि अधिग्रहण से संबंधित अड़चनें, वैधानिक मंजूरी मिलने में देरी, अतिक्रमण हटाना, कानून और व्यवस्था, ठेकेदार का खराब प्रदर्शन और कोविड-19 महामारी, भारी बारिश, बाढ़, चक्रवात, भूस्खलन आदि जैसी अप्रत्याशित घटनाएं शामिल हैं।