No Helmet No Fuel: इस राज्य में अब हेलमेट नहीं पहना तो नहीं मिलेगा पेट्रोल, सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए लागू होगा नया नियम

No helmet no fuel: भारत में हर साल हजारों लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवाते हैं। दोपहिया वाहन सवारों की सड़क दुर्घटनाओं में ज्यादातर मौतें हेलमेट न पहनने के कारण होती हैं। इन हादसों को कम करने के लिए सरकारें अलग-अलग नीतियां और नियम बनाती हैं। अब, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुआई वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने दोपहिया वाहन मालिकों के लिए एक नई नीति प्रस्तावित की है

अपडेटेड Jan 12, 2025 पर 8:32 PM
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No helmet no fuel: यह कदम राज्यभर में दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों को रोकने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है

No helmet no fuel policy in UP: उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने दोपहिया वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं और मौतों की घटनाओं में कमी लाने के लिए राज्य भर में 'हेलमेट नहीं तो तेल नहीं' सख्त नीति लागू करने का प्रस्ताव पेश किया है। परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने गत 8 जनवरी को एक आधिकारिक पत्र जारी कर सभी पेट्रोल पंप मालिकों को निर्देश दिया कि वे हेलमेट लगाए बगैर पेट्रोल खरीदने के लिए आने वाले लोगों को तेल न दें।

राज्य के सभी 75 जिलों के जिलाधिकारियों और संभागीय परिवहन आयुक्तों को भेजे गए पत्र में इस निर्देश को तत्काल लागू करने पर जोर दिया गया है। इस पत्र में दुर्घटना से संबंधित डेटा का हवाला दिया गया है। जिसमें दर्शाता है कि दोपहिया वाहन दुर्घटना के शिकार लोगों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की होती है जिन्होंने घटना के समय हेलमेट नहीं लगा रखा होता।

इसमें राज्य में सड़क सुरक्षा उपायों की समीक्षा के दौरान इस महीने की शुरुआत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जारी किए गए निर्देशों पर भी प्रकाश डाला गया है। मुख्यमंत्री ने कहा था कि राज्य में हर साल सड़क हादसों में 25-26 हजार लोग मारे जाते हैं।


बिना हेलमेट की अधिक होती हैं मौतें!

पीटीआई के मुताबिक पत्र में कहा गया है, "दोपहिया वाहन सवारों की सड़क दुर्घटनाओं में ज्यादातर मौतें हेलमेट न पहनने के कारण होती हैं। इस नीति का उद्देश्य लोगों की जान बचाना और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना है।"

सिंह ने कहा कि यह पहल 2019 में गौतमबुद्ध नगर जिले में पहले भी शुरू की गई थी। लेकिन इसे व्यापक रूप से लागू नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि नए निर्देश में राज्य के सभी जिलों में नियम को सख्ती से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। परिवहन आयुक्त ने इस नीति का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए कदम भी सुझाए हैं।

पेट्रोल पंपों को बोर्ड लगाने के निर्देश

पत्र में कहा गया है, "पेट्रोल पंप संचालकों को मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और उत्तर प्रदेश मोटर वाहन नियम, 1998 के प्रासंगिक प्रावधानों के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए। इस नीति की सफलता के लिए पुलिस और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) के साथ नियमित समन्वय आवश्यक है।"

सिंह ने पेट्रोल पंपों पर सुरक्षा संकेत लगाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जागरूकता बढ़ाने के लिए 'नो हेलमेट नो फ्यूल' का बोर्ड लगाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा, "सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का उपयोग करके जागरूकता अभियान बड़े पैमाने पर चलाए जाने चाहिए। इन अभियानों में हेलमेट को जीवनरक्षक उपकरण के रूप में पहनने के महत्व पर जोर दिया जाना चाहिए, न कि केवल कानूनी आवश्यकता के रूप में।"

समय-समय पर होगी समीक्षा

नीति का पालन सुनिश्चित करने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों को समय-समय पर समीक्षा करने के लिए कहा गया है। पत्र में पेट्रोल पंप संचालकों से हेलमेट के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में सहायता करने का भी आग्रह किया गया है। इसमें कहा गया है, "पंप कर्मियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए। हेलमेट नहीं पहनने वाले दोपहिया सवारों को तेल देने से मना करना चाहिए। साथ ही बार-बार उल्लंघन करने वालों के बारे में अधिकारियों को सूचित करना चाहिए।"

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परिवहन विभाग ने जनता से हेलमेट को न केवल अनिवार्य सुरक्षा उपाय के रूप में, बल्कि जीवन की रक्षा करने वाले एक महत्वपूर्ण कवच के रूप में मानने की भी अपील की। सिंह ने कहा, "इस पहल का उद्देश्य वाहन चालकों में जिम्मेदारी की भावना पैदा करना तथा सड़क पर सुरक्षित व्यवहार की संस्कृति विकसित करना है।"

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