"मैं निर्धनता हूं...", Paytm के फाउंडर विजय शेखर शर्मा ने शेयर की 10वीं क्लास में लिखी अपनी कविता

Paytm के फाउंडर विजय शेखर शर्मा ने बताया कि उन्होंने साल 1991 में अपने स्कूल मैगजीन के लिए एक कविता लिखी थी और उस वक्त वह 10वीं कक्षा के छात्र थे

अपडेटेड Aug 11, 2022 पर 6:23 PM
Story continues below Advertisement
विजय शेखर शर्मा (Vijay Shekhar Sharma) की कविता 'विश्वास करो कर्म में' शीर्षक से स्कूल मैगजीन में प्रकाशित हुई थी

"मैं निर्धनता हूं, तुम मुझे मिटाना चाहते हो, या कुछ करके दिखाना चाहते हो, पर मुझे प्रिय हो।" यह लाइन है उस कविता की, जिसे पेटीएम (Paytm) के फाउंडर विजय शेखर शर्मा (Vijay Shekhar Sharma) ने अपने स्कूल के दिनों में लिखा था।

विजय शेखर शर्मा ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी इस कविता को लोगों के साथ साझा किया। शर्मा ने बताया कि उन्होंने यह कविता साल 1991 में अपने स्कूल मैगजीन के लिए लिखी थी और तब वह 10वीं कक्षा के छात्र थे। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "अभी मुझे मेरी एक कविता मिली, जो मेरे 1991 में मेरे स्कूल मैगजीन में प्रकाशित हुई थी। मैं तब 10वीं कक्षा में था।"

'विश्वास करो कर्म में' शीर्षक से प्रकाशित इस कविता में विजय शेखर शर्मा ने गरीबी को मिटाने और ज्ञान हासिल करने की दिशा में परिश्रम के महत्व पर जोर दिया है। ट्विटर पर कई यूजर्स ने पेटीएम फाउंडर की इस कविता की तारीफ की है। अजय अग्रवाल नाम के एक यूजर्स ने लिखा, "15 साल के एक छात्र के हिसाब से यह कविता वास्तव में काफी गहरा और एक दिशा देने वाला है।"


यह भी पढ़ें- जानिए जुलाई में सौरभ मुखर्जी, समीर अरोड़ा और दूसरे PMS फंड मैनजर के फंड का रिटर्न कैसा रहा

वहीं पीयूष दीवान नाम के एक यूजर्स ने लिखा, "किसी को अपने बचपन के विश्वासों के साथ जीते और उस पर चलकर अलग राह बनाते हुए देखना बहुत दुर्लभ है। प्रशंसनीय सर!"

पेटीएम फाउंडर विजय शेखर शर्मा की इस कविता को आप नीचे पढ़ सकते हैं-

"मैं निर्धनता हूं,

तुम मुझे मिटाना चाहते हो,

या कुछ करके दिखाना चाहते हो,

पर मुझे प्रिय हो-

मैं तुम्हें प्रेम करती हूं।

इसीलिए फटे पुराने कपड़े पहनते हो,

फैलाकर हाथ बाबूजी बाबूजी करते हो।

मैं तुम्हारा नसीब हूं,

इसीलिए तुम्हारे करीब हूं।

लेकिन तुम चाहो तो कीचड़ में कमल खिला सकते हो

धरती आकाश मिला सकते हो।

मुझको समझो, श्रम को अपनाओ,

मैं तुम्हारी पाठशाला हूं,

पढ़कर विश्वास करो कर्म में,

जागो, उठो जमीन को हिला दो,

इस दुनिया से अज्ञान के साथ मुझे भी मिटा दो।

देखो विश्वास बुला रहा है,

उगता सूरज तुम्हें रात दिखा रहा है।।"

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।