प्रोजेक्ट चीता से जुड़े इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रिकवरी शुरू होने से पहले कूनो नेशनल पार्क में 20 चीतों की आबादी में से केवल पांच से सात चीते ही जीवित रह सकते हैं। चूंकि एक चौथाई आबादी पहले ही खत्म हो चुकी है, इसलिए साल के अंत से पहले और अधिक मौतों की आशंका है। इस आंकलन में संरक्षणवादियों का कहना है कि अब तक जंगली चीतों की मृत्यु दर सामान्य मापदंडों के भीतर रही है। जब दक्षिण अफ्रीका में साल 1966 में चीतों को फिर से बसाना शुरू किया गया था तो उस प्रोसेस में भी 26 साल लगे थे और इस दौरान 200 चीतों की मृत्यु हुई थी।
