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Qutub Minar Case: कुतुब मीनार एक स्मारक है, किसी को भी पूजा-पाठ का अधिकार नहीं, अदालत में ASI का जवाब

Qutub Minar Case: एक याचिका में मांग की गई थी कि कुतुब मीनार के निर्माण के लिए कथित रूप से तोड़े गए 27 मंदिरों को दोबारा से बनवाया जाए

MoneyControl Newsअपडेटेड May 24, 2022 पर 1:55 PM
Qutub Minar Case: कुतुब मीनार एक स्मारक है, किसी को भी पूजा-पाठ का अधिकार नहीं, अदालत में ASI का जवाब
कुतुब मीनार एक स्मारक है, किसी को भी पूजा-पाठ का अधिकार नहीं (FILE PHOTO)

Qutub Minar Case: कुतुब मीनार (Qutub Minar) परिसर में सुनवाई फिलहाल दिल्ली की एक अदालत (Delhi Court) में चल रही है। अपीलकर्ताओं में से एक, हरि शंकर जैन ने मंदिरों को दोबारा बनाए जाने और परिसर में पूजा करने की मांग की है। इस पर कोर्ट ने कहा है कि अगर अनुमति दी गई, तो संविधान के ताने-बाने और धर्मनिरपेक्ष चरित्र को नुकसान होगा।

अदालत ने पूछा, "अब आप चाहते हैं कि इस स्मारक को जीर्णोद्धार कहकर मंदिर में बदल दिया जाए। हमारा सवाल यह है कि आप यह कैसे दावा करेंगे कि वादी को यह मानने का कानूनी अधिकार है कि यह लगभग 800 साल पहले मौजूद था?"

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने दिल्ली की एक अदालत के सामने कहा है कि कुतुब मीनार परिसर एक स्मारक है। ASI ने कहा कि कोई भी ऐसा स्ट्रक्चर पर मौलिक अधिकार का दावा नहीं कर सकता है।

दरअसल इस याचिका में मांग की गई थी कि कुतुब मीनार के निर्माण के लिए कथित रूप से तोड़े गए 27 मंदिरों को दोबारा से बनवाया जाए। इस याचिका के जवाब में ASI ने अदालत में एक हलफनामा दायर किया है।

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