PHOTOS: हरिद्वार में गंगा के नीचे मिलीं ट्रेन की पटरियां! पानी के अंदर कहां से आया रेलवे ट्रैक, खुल गया रहस्य

Haridwar Railway Track Under Ganga: हरिद्वार में हर की पैड़ी के पास पूरा घाट सूखा हुआ है और तलहटी तक नजर आ रही है। अब यहां रेलवे की पटरियों जैसा लोह का ट्रैक नजर आ रह हैं। हरिद्वार रेलवे स्टेशन से करीब 3 किलोमीटर दूर ये ट्रैक लोगों के मन में जिज्ञासा पैदा कर रहे हैं

अपडेटेड Oct 21, 2024 पर 2:00 PM
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हरिद्वार में बह रही गंग नहर को इन दिनों सफाई के लिए बंद कर दिया गया है। गंगा का पानी रोके जाने के बाद से हर की पैड़ी और VIP घाट पर बहने वाली गंगा की धारा सूख गई है। तेज बहाव के साथ बहने वाली गंगा का पानी रोके जाने के बाद हर की पैड़ी और दूसरे घाटों का नाजारा एकदम ही बदल गया। हालांकि, उस वक्त सब चौंक गए, जब गंगा के अंदर से ट्रेन की पटरियां नजर आई, जो लोगों के लिए एक उत्‍सुकता का विषय बन गया है। हर कोई यही जानना चाह रहा है कि भला गंगा जी के नीचे ये रेल की पटरियां कैसे आईं, क्‍या यहां पहले कभी ट्रेन भी चलती थी?

दरअसल, हरिद्वार में हर की पैड़ी के पास पूरा घाट सूखा हुआ है और तलहटी तक नजर आ रही है। अब यहां रेलवे की पटरियों जैसा लोह का ट्रैक नजर आ रह हैं। हरिद्वार रेलवे स्टेशन से करीब 3 किलोमीटर दूर ये ट्रैक लोगों के मन में जिज्ञासा पैदा कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर इन रेलवे ट्रैक की वीडियो और फोटो शेयर कर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। कोई कह रहा है कि इस जगह पर पहले छोटी ट्रेन चला करती थीं, तो कोई इसे पानी में चलने वाली छोटी गाड़ी की प्रक्रिया बता रहा है।


हरिद्वार के पुराने इतिहास और जानकार आदेश त्‍यागी बताते हैं कि 1850 के आसपास गंग नहर के निर्माण के दौरान इन ट्रैक पर चलने वाली हाथगाड़ी का इस्तेमाल निर्माण सामग्री ढोने के लिए किया जाता था। भीमगौड़ा बैराज से डाम कोठी तक डैम और तटबंध बनाए जाने का काम पूरा होने के बाद अंग्रेज अफसर निरीक्षण करने के लिए इन गाड़ियों का इस्तेमाल करते थे।

Ganga Railway Track

इतिहास के जानकार प्रोफेसर डॉ. संजय महेश्‍वरी बताते हैं कि गंग नहर लॉर्ड डलहौजी का एक बड़ा प्रोजेक्ट था। इसे इंजीनियर कोटले के सुपरविजन में तैयार किया गया था। ब्रिटिश काल में कई ऐसे बड़े निर्माण किए गए, जिनकी आधुनिक भारत में अहम भूमिका है।

इतिहासकारों का दावा है कि रुड़की कलियर के पास भारत की पहली रेल लाइन बिछाई गई थी। हालांकि, इसे पहली रेलवे लाइन के रूप में पहचान नहीं मिल पाई।

Ganga Railway Track 2

बता दें कि हर साल मेंटेनेंस के लिए यूपी सिंचाई विभाग की ओर से गंग नहर बंद की जाती है। इससे हरिद्वार का नजारा पूरी तरह से बदल जाता है। गंगा का पानी सूख जाने से गंगा की तलहटी पर नजर आ रही ये पटरियां ब्रिटिश कालीन तकनीक की एक बानगी भी कही जा सकती है।

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