इस राज्य में मृत्युभोज है अपराध, शामिल हुए तो जाना पड़ सकता है जेल

राजस्थान पुलिस इन दिनों विवाद में घिरी हुई है। 1960 में बनाए गए एक पुराने अधिनियम की वजह से पुलिस चर्चा में है। राजस्थान पुलिस ने मृत्यु भोज करवाना और उसमें शामिल होने को कानूनन दंडनीय बताया है। साथ ही बताया कि ये मानवीय दृष्टिकोण से अनुचित भी है। इस कानून का उल्लंघन किए जाने पर सजाओं का प्रावधान भी है। जानिए क्या है पूरा विवाद-

अपडेटेड Dec 14, 2023 पर 5:16 PM
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राजस्थान मृत्युभोज निवारण अधिनियम 1960 के तहत मृत्युभोज कानूनन दंडनीय बताया गया है।

Rajashthan MrityuBhoj Act 1960: राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police) ने हाल ही में अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से एक ऐसा पोस्ट डाल दिया जिसके बाद बवाल मच गया है। राजस्थान पुलिस ने बताया कि राज्य में मृत्युभोज करना कानूनी रूप से दंडनीय अपराध है। यहां तक कि मृत्युभोज में शामिल होने पर भी आपके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। पोस्ट में राजस्थान पुलिस ने मृत्युभोज में शामिल होने को सामाजिक कुरीति बताया साथ ही इसे समाज से दूर करने और इसका विरोध करने के लिए लोगों से अपील की। इस पोस्ट को 15 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं। ऐसे में इस पोस्ट पर तरह-तरह के रिएक्शन भी आ रहे हैं।

कुरीति को समाज से दूर करने का किया दावा

राजस्थान पुलिस ने लिखा है कि मृत्यु भोज करना और उसमें शामिल होना कानूनन दंडनीय है। साथ ही ये मानवीय दृष्टिकोण यह आयोजन अनुचित है। आइए मिलकर इस कुरीति को समाज से दूर करें, इसका विरोध करें। इसके साथ ही एक तस्वीर भी शेयर की गई है इस तस्वीर में मृत्युभोज की एक एनिमेटेड तस्वीर लगाई है। इस तस्वीर पर साफ-साफ अक्षरों में लिखा गया है कि किसी के दुख में उसका संबल बनकर रहें, मृत्युभोज को ना कहें। साथ ही राजस्थान मृत्युभोज निवारण अधिनियम 1960 के तहत मृत्युभोज कानूनन दंडनीय बताया गया है।


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अधिनियम में हैं ये प्रावधान

1960 में मृत्युभोज निवारण अधिनियम बनाया गया था। 2020 में भी ये मुद्दा सामने आया था क्योंकि तब भी पुलिस को इस नियम का पालन करवाने की ही हिदायत दी गई है। इस अधिनियम की धारा तीन में साफ-साफ लिखा गया है कि राज्य में कोई भी मृत्युभोज ना ही कर सकता है और ना ही उसमें शामिल हो सकता है। कानून ना केवल मृत्युभोज के आयोजन और भागीदारी पर रोक लगाता है बल्कि किसी भी तरह से सहायता करने वालों पर जुर्माना भी लगाता है। इसमें शामिल व्यक्तियों को एक साल तक की कैद और 1,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा अधिनियम में ये भी साफ किया गया है कि किसी को भी मृत्युभोज के आयोजन के लिए पैसा उधार नहीं दिया जाएगा।

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