9 अक्टूबर को इस दुनिया को अलविदा कह चुके रतन टाटा की वसीयत (Ratan Tata's Will) सामने आई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रतन टाटा अपने पीछे 10 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति छोड़ गए हैं। दिलचस्प यह है कि उनकी वसीयत में उनके युवा दोस्त शांतनु नायडू और पालतू कुत्ते 'टीटो' का भी जिक्र है। इसके अलावा भाई जिम्मी टाटा, सौतेली बहन शिरीन और डिएना जीजीभॉय, हाउस स्टाफ और अन्य लोगों के भी नाम वसीयत में मेंशन हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, रतन टाटा ने वसीयत में स्टार्टअप गुडफैलोज में अपनी कुछ हिस्सेदारी शांतनु नायडू के नाम की है। विदेश में उनकी शिक्षा पर होने वाले खर्चों को भी इसमें शामिल किया है। शांतनु टाटा ट्रस्ट के सबसे युवा जनरल मैनेजर हैं। वह रतन टाटा के बेहद करीबी और भरोसेमंद दोस्त थे। गुडफैलोज शांतनु नायडू का वेंचर है और इसमें रतन टाटा का इनवेस्टमेंट था। नायडू और टाटा की दोस्ती जानवरों के प्रति उनके साझा प्रेम से पनपी। जानवरों के लिए नायडू की प्रतिबद्धता से प्रभावित होकर रतन टाटा ने उनके उद्यम मोटोपॉज को सपोर्ट करने का फैसला किया।
पेटडॉग 'टीटो' के लिए अनलिमिटेड केयर
रतन टाटा की वसीयत में उनके निधन के बाद पेटडॉग जर्मन शेफर्ड 'टीटो' की देखभाल के लिए 'अनलिमिटेड केयर' शब्द का जिक्र किया गया है। टीटो को टाटा ने करीब 5-6 साल पहले गोद लिया था। टीटो की देखभाल की जिम्मेदारी रसोइए राजन शॉ को दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रतन टाटा की वसीयत में उनके बटलर सुब्बैया को भी जगह दी गई है।
वसीयत के हिसाब से रतन टाटा ने संपत्ति के बंटवारे का जिम्मा अपनी सौतेली बहनों शिरीन और डायना जीजीभॉय के साथ-साथ वकील दारायस खंबाटा और अपने करीबी दोस्त मेहली मिस्त्री को दिया है।
रतन टाटा के एसेट्स में क्या-क्या शामिल
रतन टाटा के एसेट्स में अलीबाग स्थित 2,000 वर्ग फीट का बंगला, मुंबई की जुहू तारा रोड पर 2 मंजिला मकान, 350 करोड़ रुपये से ज्यादा के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), टाटा संस में 0.83% हिस्सेदारी शामिल है। टाटा संस, 165 अरब डॉलर (करीब 13.94 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा के टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रतन टाटा की टाटा संस में 0.83% हिस्सेदारी रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन (RTEF) को जाएगी।
रतन टाटा के पास 20-30 कारों का कलेक्शन था, जिनमें लग्जरी मॉडल भी शामिल हैं। कोलाबा के हेलेकाई हाउस का मालिकाना हक ईवार्ट इनवेस्टमेंट्स के पास है। यह टाटा संस की 100% सहायक कंपनी है। इस हाउस का भविष्य ईवार्ट तय करेगी।