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सैफ अली खान पर हमला: मजदूर की गिरफ्तारी से बैकग्राउंड चेक को लेकर शुरू हुई बहस, डेवलपर्स बोले- पूरी तरह वेरिफिकेशन 'असंभव'

सैफ अली खान मामले में संदिग्ध को ठाणे से एक कंस्ट्रक्शन साइट के लेबर शिविर के पास से गिरफ्तार किया गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस का कहना है कि वह बांग्लादेशी नागरिक है और करीब छह महीने पहले देश में आया था, लेकिन संदिग्ध के वकील ने इससे इनकार किया है। कई लेबर कॉन्ट्रैक्टर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और कुछ उत्तर-पूर्वी राज्यों से हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 20, 2025 पर 9:17 PM
सैफ अली खान पर हमला: मजदूर की गिरफ्तारी से बैकग्राउंड चेक को लेकर शुरू हुई बहस, डेवलपर्स बोले- पूरी तरह वेरिफिकेशन 'असंभव'
सैफ अली खान पर हमला: मजदूर की गिरफ्तारी से बैकग्राउंड चेक को लेकर शुरू हुई बहस

एक्टर सैफ अली खान पर हमले ने एक नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि कई रिपोर्ट में ऐसे दावा किया गया था कि हमला करने वाला एक मजदूर है और वह शायद भारत का नागरिक नहीं है और उसने अपनी पहचान गलत बताई। इसी के मद्देनजर डेवलपर्स और कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि मजदूरों की पहचान और क्रिमिनल रिकॉर्ड का पूरी तरह से वेरिफिकेशन कर पाना लगभग असंभव होता है। उनका कहना है कि दूसरे राज्यों से मजदूरों की आउटसोर्सिंग के बढ़ते लेवल के कारण यह काम और भी मुश्किल हो गया है।

सैफ अली खान मामले में संदिग्ध को ठाणे से एक कंस्ट्रक्शन साइट के लेबर शिविर के पास से गिरफ्तार किया गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस का कहना है कि वह बांग्लादेशी नागरिक है और करीब छह महीने पहले देश में आया था, लेकिन संदिग्ध के वकील ने इससे इनकार किया है।

सूत्रों ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने रियल एस्टेट डेवलपर्स और निर्माण एजेंसियों से प्रोजेक्ट साइट्स और लेबर कैंप में वर्कफोर्स की पूरे बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और पहचान सुनिश्चित करने को कहा है।

कई लेबर कॉन्ट्रैक्टर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और कुछ उत्तर-पूर्वी राज्यों से हैं, और मजदूरों को गांवों और छोटे शहरों से बड़ी संख्या में भर्ती किया जाता है। अक्सर, उन्हें डेवलपर्स या ठेकेदारों की ओर से प्रोजेक्ट साइट पर या उसके आस-पास अस्थायी लेबर कैंप में रखा जाता है।

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