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Shailaja Paik: कौन हैं शैलजा पाइक? जाति की दीवार तोड़ने वाली दलित इतिहासकार को मिला $8,00,000 का 'जीनियस ग्रांट'

hailaja Paik: पुणे की झुग्गी बस्ती की दलित इतिहासकार और फिलहाल अमेरिका में रहने वाली प्रोफेसर और राइटर शैलजा पाइक $800000 की प्रतिष्ठित और बहुप्रतीक्षित एवं अक्सर अनौपचारिक रूप से 'जीनियस ग्रांट' कहे जाने वाले मैकआर्थर फेलोशिप पाने वाली पहली दलित महिला बन गई हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 04, 2024 पर 12:52 PM
Shailaja Paik: कौन हैं शैलजा पाइक? जाति की दीवार तोड़ने वाली दलित इतिहासकार को मिला $8,00,000 का 'जीनियस ग्रांट'
Shailaja Paik: जाति की दीवार तोड़ने वाली इतिहासकार शैलजा पाइक 'जीनियस ग्रांट' से सम्मानित होने वाली पहली भारतीय महिला हैं

Shailaja Paik: दलित महिलाओं पर रिसर्च और कई किताब लिखने वाली भारतीय-अमेरिकी प्रोफेसर शैलजा पाइक (Who is Shailaja Paik) को मैकआर्थर फाउंडेशन से 800,000 डॉलर का 'जीनियस ग्रांट' मिला है। मैकआर्थर फाउंडेशन (MacArthur Foundation) हर साल असाधारण उपलब्धियों या क्षमता वाले लोगों को यह पुरस्कार देता है। शैलजा पाइक $800000 की प्रतिष्ठित 'जीनियस ग्रांट' कहे जाने वाले 'मैकआर्थर फेलोशिप (MacArthur Fellowship)' पाने वाली पहली भारतीय दलित महिला बन गई हैं। पुणे के यरवदा झुग्गी बस्ती में अपने माता-पिता और तीन बहनों के साथ टिन के डिब्बे में पली-बढ़ी प्रोफेसर शैलजा पाइक ने घातक जातिगत पूर्वाग्रहों से लड़ाई लड़ी।

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के जिस गांव से उनका परिवार 1990 में पलायन कर गया था, वहां दलित लोगों को नियमित रूप से सार्वजनिक ट्यूबवेल और नलों पर दूर खड़े होने के लिए मजबूर किया जाता था ताकि वे जाति-कुलीनों के बर्तनों को न छूएं। एक बार जब वे एक उच्च जाति के परिवार से मिलने गई, तो उनकी दादी और उन्हें चाय के कप दिए गए और मिट्टी के फर्श पर बैठने के लिए कहा गया। जबकि उच्च जाति की महिला एक कुर्सी पर बैठी थी।

पाइक अब अमेरिका के सिनसिनाटी विश्वविद्यालय (University of Cincinnati) में इतिहास की प्रोफेसर हैं। उनको मंगलवार को 2024 के लिए 22 मैकआर्थर फेलो में से एक नामित किया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय की वेबसाइट से कहा, "मुझे यकीन नहीं था कि मैं सही सुन रही हूं, लेकिन मैंने अपना आपा नहीं खोया... मैं बहुत खुश थी।" शैलजा को मिलने वाली यह छात्रवृत्ति आधुनिक भारत में दलित रिसर्च, जेंडर और कामुकता की व्याख्या करने पर केंद्रित है। उनके काम ने दलित नारीवादी विचार के अध्ययन को व्यापक और गहरा किया है।

800,000 डॉलर का मिला पुरस्कार

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