बाजार में कुछ भी सामान खरीदने से पहले चौकन्ना रहने की जरूरत है। अगर आप किसी चीज को तौल में ले रहे हैं तो हमेशा सर्तक रहें। दुकानदारों की ओर से ग्राहकों के साथ कब ठगी हो जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है। बहुत से दुकानदार तौल में कांटा मार देते हैं। जिससे एक किलो का सामान आपको 800 ग्राम ही मिलेगा। करीब 200-300 ग्राम तक दुकानदार कांटा मार देते हैं। फल-सब्जी तौलने वाले दुकानदार ग्राहकों के साथ कैसे ठगी करते हैं, इस बारे में सोशल मीडिया में एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। जिसमें एक दुकानदार ने बड़ा खुलासा किया है।
दरअसल, दुकानदारों की तौल की जांच पड़ताल करने की जिम्मेदारी बाट-तौल माप अधिकारी की होती है। यह राज्य सरकार के तहत आता है। हर जिले में माप-तौल के दफ्तर होते हैं। इसके साथ ही तहसील स्तर पर भी बाट तौल माप अधिकारी होता है। जो तराजू, बाट की जांच पड़ताल करते हैं। उनकी मुहर लगती है। इसके बाद तराजू और बाट का इस्तेमाल किया जाता है।
दुकानदार ने बताया कैसे ग्राहकों के साथ होती है ठगी?
सोशल मीडिया पर एक शख्स ने वीडियो शेयर किया है। जिसमें बताया गया है कि तराजू के साथ कैसे हेर-फेर किया जाता है। इसमें दुकानदार ने बताया कि किस तरह से वो लोगों को एक आसान तरीके से ठगी का शिकार बनाते हैं। सामान का वजन करने के दौरान वो तराजू के एक हिस्से को इस तरह से घूमा देते हैं। आम बोलचाल में इसे कांटा मारना कहते हैं। यानी तराजू की कड़ी चढ़ा दी जाती है। इससे 1 किलो का सामान करीब 200 ग्राम कम हो जाता है। कभी-कभी यह 300 ग्राम तक कम हो जाता है। वहीं ग्राहक भी कांटा मारने की इस कला से परिचित नहीं होते हैं। सामान खरीदते समय ग्राहकों की नजर सुई पर रहती है। हर किसी की नजर तराजू की कड़ी पर नहीं होती है। यहीं से ग्राहक के साथ खेल कर दिया जाता है।
तराजू में चुंबक लगाकर करते हैं ठगी
वहीं कुछ दुकानदार तराजू में एक सिरे पर चुंबक भी लगा देते है। जिससे लिए गए सामान का वजन कम हो जाता है। तराजू की सुई देखकर आपको बराबर लगेगा, लेकिन यहां भी दुकानदार खेल कर जाते हैं।
ग्राहक इन बातों का रखें ध्यान
फल-सब्जी तौलवाने से पहले बाट हटाकर तराजू की जांच कर लें। फिर तराजू पर बाट रखवाकर जांच करें। बाटों को हाथों में लेकर जांच लें। परंपरागत तराजू के निचले हिस्से में लगे लोहे के हुक को देख लें कि वह तिरछा तो नहीं है। शंका हो तो सामग्री खरीदकर किसी अन्य स्थान पर तौल करा लें। कम हो तो फौरन संबंधित अधिकारियों से शिकायत करें।