Skincare: आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्किन का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है। बड़े शहरों में इतना प्रदूषण बढ़ गया है कि सेहत और स्किन की भी देखभाल करना बहुत जरूरी हो गया है। वैसे भी आजकल लोग गोरा होने के लिए न जाने कितनी क्रीमों का इस्तेमाल कर डालते हैं। इससे उन्हें कितना फायदा होता है। यह तो लगाने वाले ही बता सकते हैँ। ऐसे ही अगर आप अपनी स्किन में पड़े दाग धब्बों को मिटाने के लिए किसी स्किनकेयर की तलाश में हैं तो आपके लिए एक बेहतर सामग्री का सुझाव दे रहे हैं। इसका नाम अर्बुटिन (Arbutin) है।
इसे हाइड्रोक्विनोन (फिनॉल) का एक प्रकार है। इसी से अर्बुटिन बनाया जाता है। बॉम्बे स्किन क्लीनिक के डा. बातुल पटेल (Dr Batul Patel) का कहना है कि यह इनग्रेडिएंट Ericaceae family के एक पौधे से निकाला जाता है। इस फैमिली के पौधों में bearberry, blueberry and cranberry जैसे फल मिलते हैं। इसके अलावा इस इनग्रेडिएंट को लेब में भी बनाया जा सकता है। यह दो तरह का होता है। एक है अल्फा और दूसरा है बीटा अर्बुटिन।
स्किन के डॉक्टरों का मानना है कि इससे चेहरे पर पड़ने वाले काले धब्बे कम हो जाते हैं। स्किन में ग्लो आता है। इसके साथ ही स्किन पर पड़ने वाली धूल को अच्छे से साफ कर देता है। अगर आपका चेहरा धूप में काला पड़ जाता है तो इसके नियमित उपयोग से काफी फायदा मिलेगा। उम्र बढ़ने के साथ स्किन में चमक कम हो रही है तो इसे लगाने से स्किन में चमक बढ़ने लगेगी। इतना ही नहीं मेलास्मा की परेशानी से निजात मिलती है। बता दें कि मेलास्मा स्किन से जुड़ी एक परेशानी है। जिसमें त्वचा भूरी और धब्बेदार हो जाती है। इसे आमतौर पर लोग झाइयों के नाम से जानते हैं। यह आमतौर पर आपके गालों, आपकी नाक के पुल, माथे, ठुड्डी या आपके ऊपरी होंठ के ऊपर दिखाई देता है। यह आपके शरीर के उन हिस्सों पर भी दिखाई दे सकता है जो सूरज की किरणों के संपर्क में आते हैं।
मुहासों की हो जाएगी छुट्टी
अगर चेहरे पर मुहासों के दाग पड़ गए हैं। वो दाग लाल भूरे या कैसे भी हों। हर तरह के दाग को खत्म करने में यह मदद करता है। इसे रेटिनॉल (retinol) आधारित क्रीम के साथ लगाया जाता है। इससे चेहरे की चमक बढ़ने लगेगी। इतना ही नहीं यह हाइपर पिगमेंटेशन (hyperpigmentation) को भी कम करने में मदद करता है। आर्बुटिन के इस्तेमल से विटामिन C के मुकाबले बेहतर नतीजे मिलते हैं।
बता दें कि हाइपरपिग्मेंटेशन तब होता है जब स्किन इनफ्लेम्ड या डैमेज्ड होती है। ऐसे में आपकी स्किन जरूरत से ज्यादा मेलेनिन बनाने लगती हैं। ऐसा करने में स्किन सेल्स पर काफी स्ट्रेस पड़ता है। इसलिए ये आपकी स्किन के लिए बहुत अच्छा नहीं है।