Solar Eclipse 2024: 2 अक्टूबर को दिखाई देगा रिंग ऑफ फायर, साल का होगा आखिरी सूर्य ग्रहण, जानिए सूतक काल लगेगा या नहीं?

Surya Grahan 2024: हिंदू धर्म में सूर्य और चंद्र दोनों ग्रहण को शुभ नहीं माना गया है। ग्रहण के समय सभी मांगलिक और शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है। अभी हाल ही में साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगा था और अब 2 अक्टूबर को इस साल का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने वाला है। सूर्य ग्रहण के 12 घंटे पहले सूतक काल का समय शुरू हो जाता है

अपडेटेड Sep 30, 2024 पर 9:36 AM
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Surya Grahan 2024: यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। जिससे आसमान में आग की रिंग बन जाएगी।

इस बार ग्रह-नक्षत्रों के हिसाब से अक्टूबर 2024 का महीना बहुत ही खास रहने वाला होगा। 2 अक्टूबर तो साल का दूसरा और आखिर सूर्य ग्रहण लगेगा। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जो आसमान में रिंग ऑफ फायर बनाएगा। इस दिन पितृ अमावस्या भी है। भारतीय समयानुसार, रात 9.47 बजे से सूर्य ग्रहण शुरू होगा। सूर्य ग्रहण समाप्त 3 अक्टूबर को तड़के सुबह 3.17 बजे होगा। सूर्य ग्रहण के 12 घंटे पहले सूतक काल का समय शुरू हो जाता है। मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल के समय पृथ्वी का वातावरण दूषित होता है। सूतक के अशुभ दोषों से बचने के लिए जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए।

इस साल का अंतिम अमेरिका, अर्जेटीना, अंटार्कटिका, उरुग्वे, होनोलूलू, ब्यूनत आयर्स, आर्कटिक, प्रशांत महासागर, पेरी, चिली, और आइलैंड के उत्तरी भाग में दिखाई देगा। यह भारत में दिखाई नहीं देगा। लिहाजा भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा।

कब लगता है सूर्य ग्रहण?


विज्ञान के अनुसार, चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर एक कक्षा में परिक्रमा करता है। इसी समय पृथ्वी भी सूर्य की परिक्रमा करती है। परिक्रमा के दौरान कभी-कभी चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। उस समय पृथ्वी पर सूर्य का प्रकाश न पड़कर चंद्रमा की परछाई नजर आने लगती है। इसी स्थिति को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। खगोलशास्त्र और विज्ञान में इसे ही सूर्य ग्रहण कहते हैं। सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन ही लगता है। इसकी वजह ये है कि अमावस्या में चंद्रमा पृथ्वी के कक्षीय समतल के निकट होता है। सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं। आंशिक सूर्य ग्रहण, वलयाकार सूर्य ग्रहण और पूर्ण सूर्य ग्रहण।

रिंग ऑफ फायर क्या है?

वलयाकार रिंग के दौरान चंद्रमा पृथ्वी से दूर होता है तो इसका आकार बदल जाता है। यह तब देखने में छोटा लगता है। सूर्य ग्रहण के दौरान यह सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता। इस कारण सूर्य के किनारे दिखाई देते हैं। पृथ्वी से इस नजारे को देखने पर ऐसा लगता है जैसे आसमान में आग की रिंग है। यह सूर्य ग्रहण 6 घंटे से ज्यादा तक चलेगा। हालांकि अगर आप भारत में इसे देखना चाहते हैं तो आपको निराश होना पड़ेगा। क्योंकि यह वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत में नहीं लगेगा। यह दक्षिणी अमेरिका में लगेगा।

सूर्य ग्रहण से अधिक होते हैं चंद्र ग्रहण

साल में लगने वाले सूर्य ग्रहण से चंद्र ग्रहण की संख्या ज्यादा होती है। विज्ञान में इसका कारण बताते हुए कहा गया है कि चंद्र ग्रहण पृथ्वी के आधे से अधिक भाग से दिखाई पड़ते हैं। वहीं सूर्य ग्रहण पृथ्वी के बहुत बड़े भाग में सौ मील से कम चौड़े या दो-तीन हजार मील लंबे भूभाग से दिखाई देते हैं।

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