Sugar Free: जीरो कैलोरी या नो शुगर के चक्कर में कहीं बिगड़ न जाए सेहत, WHO ने जारी किया अलर्ट

Sugar Free: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मोटापा और वजन कम करने के नाम पर आर्टिफिशियल स्वीटनर्स के इस्तेमाल के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है। WHO के मुताबिक यह जानलेवा हो सकता है। आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल करने वाले लोगों में टाइप टू डायबिटीज, दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है

अपडेटेड May 17, 2023 पर 9:21 AM
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भारत में बहुत से लोग खाने पीने की चीजों में शुगर फ्री स्वीटनर का इस्तेमाल करते हैं

Sugar Free: आज कल लोगों में खुद को हेल्दी बनाए रखने के लिए अपने भोजन में चीनी की मात्रा को कम करने का चलन है। वहीं बहुत से लोग शुगर को कंट्रोल करने के लिए रोजाना शुगर फ्री गोलियां, मिठाई का सेवन करते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं तो सावधान होन की जरूरत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization – WHO) ने आर्टिफिशियल स्वीटनर्स यानी गैर-चीनी मिठास के खिलाफ चेतावनी जारी की है। WHO के मुताबिक लंबे वक़्त तक आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल करने वाले लोगों में टाइप टू डायबिटीज, दिल की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।

दरअसल, लोगों के बीच यह धारणा बनी हुई है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर्स से मोटापा कम करने और वजन घटाने में मदद मिलती है। लेकिन डाइट कोक या इस तरह की चीजों में मौजूद नॉन शुगर स्वीटनर हेडेक, डिप्रेशन और शरीर में ऐठन जैसी बीमारियां पैदा कर सकता है।

आर्टिफिशियल स्वीटनर सेहत के लिए नुकसानदायक


विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि नेचुरल या सिंथेटिक, किसी भी आर्टिफिशियल स्वीटनर (Sugarfree sweetner) का इस्तेमाल खाने पीने की चीजों में नहीं किया जाना चाहिए। वजन को कंट्रोल करने या कैलोरी की कम मात्रा के सेवन के हिसाब से नेचुरल फ्रूट स्वीटनर ज्यादा फायदेमंद है। WHO की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर खाने पीने की किसी चीज में मिठास लाना जरूरी हो तो इसके लिए नेचुरल फ्रूट्स स्वीटनर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। WHO का कहना है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर में कोई न्यूट्रिश्नल वैल्यू भी नहीं है। कुछ लोगों को यह भी लगता है कि नॉन कम्यूनिकेबल डिजीज के रिस्क को कम करता है। यह धारणा भी गलत है। कुलमिलाकर यह नकुसान पहुंचाते हैं।

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बढ़ा बीमारियों का खतरा

WHO ने अपनी रिसर्च का हवाला देते हुए कहा कि 3 महीने तक शुगर फ्री मीठा इस्तेमाल करने से थोड़ा वजन घटा और कैलोरी कम हुई। लेकिन शरीर में ग्लूकोज की मात्रा कम नहीं हुई। उल्टे दिल की बीमारी की समस्या से दोचार होना पड़ा। इसके साथ ही ब्लड में शुगर की मात्रा भी कम नहीं हुई। ये देखा गया कि जिन लोगों ने 6-18 महीने तक ऐसा मीठा खाया, उनका वजन भी नहीं घटा है।

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