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Train Accident: देश में 60 साल पहले एक ऐसा रेल हादसा, जब समंदर में समा गई पूरी ट्रेन, 200 यात्री और 5 कर्मचारी आज भी लापता

Train Accident: भारतीय रेल के इतिहास में एक ऐसा ट्रेन हादसा हुआ है, जिसे आज भी जो लोग सुनते हैं, उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं। ट्रेन नंबर 653 अपनी बेहद धीमी रफ्तार से बढ़ रही थी। तभी वह धीरे समुद्र में समाने लगी और एक समय ऐसा आया कि पूरी ट्रेन समुद्र में डूब गई। इस हादसे में 200 लोग और 5 रेल कर्मी आज भी लापता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 09, 2024 पर 3:38 PM
Train Accident: देश में 60 साल पहले एक ऐसा रेल हादसा, जब समंदर में समा गई पूरी ट्रेन, 200 यात्री और 5 कर्मचारी आज भी लापता
Train Accident: 22 दिसंबर 1964 के दिन एक ट्रेन चक्रवाती तूफान की चपेट में आ गई। इसके बाद समंदर में समा गई।

Train Accident: इतिहास में कई ऐसी घटनाएं घटी हैं, जिन्हें सुनकर रूह कांप जाती है। इन घटनाओं में एक घटना 22 दिसंबर 1964 को घटी। जब भारत के रामेश्वरम द्वीप के किनारे धनुषकोडी में भीषण चक्रवात आया। इस चक्रवात में ट्रेन नंबर 653 भी चपेट में आ गई। यह ट्रेन समंदप में समा गई। इस रेल हादसे में न तो लोग मिले न ही उनके शव। इस हादसे में करीब 200 लोग आज भी लापता है। इसमें रेल कर्मी भी शामिल है। रेलवे के इतिहास में इसे बड़ी घटनाओं में से एक माना जा रहा है।

दरअसल, मौसम विभाग ने 15 दिसंबर 1964 को साउथ अंडमान में बन रहे एक भयंकर तूफान की चेतावनी दी थी। इसके बाद अचानक मौसम ने करवट ली और तेज तूफान के साथ झमाझम बारिश होनी शुरू हो गई। 21 दिसंबर तक मौसम ने विकराल रूप ले लिया। इसके बाद, 22 दिसंबर 1964 को श्रीलंका से चक्रवाती तूफान ने करीब 110 किलोमीटरप्रति घंटे की रफ्तार से भारत की ओर रुख किया। यह तूफान ही भारतीय ट्रेन को लील गया।

लोको पायलट ने उठाया जोखिम

22 दिसंबर 1964 को ट्रेन नंबर 653 अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही थी। तभी चक्रवाती तूफान आ गया। तभी तमिलनाडु के धनुषकोडी रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर आर. सुंदरराज स्टेशन में ताला लगाकर अपने घर जा चुके थे। उस समय हर कोई इस बात से अनजान था कि इस रात के बाद ये स्टेशन फिर कभी नहीं खुलेगा। मौसम बहुत खराब हो चुका था। तूफान और भारी बारिश के कारण रेलवे सिग्नल खराब हो चुके थे। सिग्नल नहीं मिलने के कारण ट्रेन के लोको पायलट ने ट्रेन को धनुषकोडी रेलवे से कुछ दूरी पर रोक दिया।

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