छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कापू गांव में हुई इस शादी ने परंपराओं को ऐसा मोड़ दिया कि पूरा मोहल्ला दंग रह गया। न ढोल-नगाड़े की धुन, न बैंड-बाजा का शोर, न सात फेरे का चक्कर। और तो और, न मंगलसूत्र की चमक, न सिंदूर की लालिमा। बस संविधान की शपथ और बाबा साहेब अंबेडकर की तस्वीर थी, जिनके सामने यमन लहरे और प्रतिमा महेश्वरी ने जीवनभर साथ निभाने का वादा किया। गुरु घासीदास जयंती के खास मौके पर आयोजित इस शादी में दूल्हा-दुल्हन ने वैदिक मंत्रोच्चार को एक कोने में रख दिया और संविधान की प्रस्तावना पढ़कर एक-दूसरे को वरमाला पहना दी। शादी इतनी सादगी भरी थी कि पंडितजी भी सोच रहे होंगे, भाई, कम से कम न्योता तो दे देते।
