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Unique Wedding: यह कपल बिना सात फेरे लिए हुए एक दूजे के, संविधान को माना साक्षी, पढ़ें छत्तीसगढ़ की अनोखी कहानी

Unique Wedding: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कापू गांव में हुई एक अनोखी शादी चर्चा का विषय बन गई है। न सात फेरे हुए, न बैंड बाजा बजा। गुरु घासीदास जयंती के अवसर पर दूल्हा-दुल्हन ने संविधान की शपथ लेकर वैवाहिक बंधन में बंधने का फैसला किया। परिवार और समाज ने इस सादगी भरी पहल की प्रशंसा की

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 22, 2024 पर 2:36 PM
Unique Wedding: यह कपल बिना सात फेरे लिए हुए एक दूजे के, संविधान को माना साक्षी, पढ़ें छत्तीसगढ़ की अनोखी कहानी
Unique wedding: गुरु घासीदास जयंती पर हुई अनोखी शादी

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कापू गांव में हुई इस शादी ने परंपराओं को ऐसा मोड़ दिया कि पूरा मोहल्ला दंग रह गया। न ढोल-नगाड़े की धुन, न बैंड-बाजा का शोर, न सात फेरे का चक्कर। और तो और, न मंगलसूत्र की चमक, न सिंदूर की लालिमा। बस संविधान की शपथ और बाबा साहेब अंबेडकर की तस्वीर थी, जिनके सामने यमन लहरे और प्रतिमा महेश्वरी ने जीवनभर साथ निभाने का वादा किया। गुरु घासीदास जयंती के खास मौके पर आयोजित इस शादी में दूल्हा-दुल्हन ने वैदिक मंत्रोच्चार को एक कोने में रख दिया और संविधान की प्रस्तावना पढ़कर एक-दूसरे को वरमाला पहना दी। शादी इतनी सादगी भरी थी कि पंडितजी भी सोच रहे होंगे, भाई, कम से कम न्योता तो दे देते।

इस शादी ने खर्चे को ऐसा धोबीपछाड़ मारा कि देखने वाले भी कह उठे, 'वाह! इससे बेहतर तरीका क्या होगा?' दूल्हा-दुल्हन के माता-पिता और समाज के लोग गर्व से मुस्कुराते हुए इस अनोखी पहल का हिस्सा बने।अब, कापू गांव में चर्चा है कि अगले सीजन की शादियों में संविधान के सिवा और कुछ नहीं चाहिए। लोगों ने मान लिया, 'सादगी में भी राजा-महाराजा वाला स्वैग है।'

संविधान की शपथ वाली शादी

इस शादी ने केवल परंपराओं को तोड़ा नहीं, बल्कि खर्चे को भी ‘बाय-बाय’ कर दिया। कोई बैंड-बाजा नहीं, कोई दावत नहीं। बस एक सामाजिक कार्यक्रम में संविधान की शपथ के साथ शादी हो गई। दूल्हा-दुल्हन के परिवार ने इसे एक सटीक निर्णय बताया। उनका मानना है कि फिजूलखर्ची रोकने और संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का इससे अच्छा तरीका क्या हो सकता है?

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