सोमवार को एक टॉप तमिल लीडर ने लिट्टे चीफ प्रभाकरण को लेकर बेहद ही चौंकाने वाला दावा किया है। अपने दावे में उन्होंने कहा कि लिट्टे चीफ लुपिल्लई प्रभाकरन श्रीलंका में तमिलों के लिए काफी अच्छा काम कर रहे हैं। अब उनके सामने आने का वक्त आ गया है। एक प्रेस कांफ्रेस के दौरान तमिल राष्ट्रवादी नेता पाझा नेदुमरन ने कहा कि श्रीलंका में सिंहली लोगों द्वारा सरकार के विरोध ऐसी परिस्थितियों का निर्माण किया है जिसमें अब प्रभाकरण सामने आ सकते हैं।
तमिल राष्ट्रवादी नेता पाझा नेदुमरन ने कहा कि श्राीलंका में प्रभाकरण तमिल लोगों के लिए अच्छा काम कर रहे हैं। जल्द ही प्रभाकरण श्रीलंका में तमिल लोगों के लिए एक नया ऐलान करेंगे। साथ ही तमिल राष्ट्रवादी नेता ने दुनिया के सभी हिस्सों में रहने वाले तमल लोगों को एक साथ आने की और प्रभाकरण को समर्थन देने की अपील की है। उन्होंने कहा जब तक श्रीलंका में लिट्टे सक्रिय था तब तक श्रीलंका में भारत का कोई भी दुश्मन अपने पैर नहीं पसार पाया था। बता दें कि साल 2009 में श्रीलंकाई सेना और लिट्टे के बीच हुए युद्ध में प्रभाकरण के मारे जाने की खबर आई थी।
क्या है प्रभाकरण का इतिहास
वेलुपिल्लई प्रभाकरन का जन्म 26 नवंबर, 1954 को नॉर्थ कोस्टल शहर वाल्वेत्तिथुराई में हुआ था। तमिलों के श्रीलंका सरकार के भेदभाव से नाराज होकर प्रभाकरण ने छात्र संगठन छात्र संगठन तमिल यूथ फ्रंट (टीवाईएफ) में शामिल हो गए। प्रभाकरण ने साल 1972 में तमिल न्यू टाइगर्स का निर्माण किया था। 5 मई, 1976 को टीएनटी का नाम बदलकर लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) कर दिया गया।
साल 1983 को प्रभाकरण ने पुलिस पर किया था बड़ा हमला
23 जुलाई, 1983 को, LTTE ने श्रीलंका के थिरुनेलवेली में सेना के एक गश्ती दल पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें 13 श्रीलंकाई सैनिक मारे गए थे। जिसके बाद श्रीलंका में तमिल विरोधी दंगे भी भड़क गए थे। जिसके बाद कई सारे श्रीलंकाई तमिल लिट्टे में शामिल हो गए थे। बता दें कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में भी लिट्टे का नाम सामने आया था। साल 2009 में श्रीलंकाई सेना और लिट्टे के बीच लड़ाई में प्रभाकरण के मारे जाने की खबर आई थी।