World's Most Expensive Mango: दुनिया का सबसे महंगा आम! कर्नाटक का यह किसान बेच रहा एक किलो ₹300000 में

World's Most Expensive Mango: दुनिया का सबसे महंगा आम बेचकर कर्नाटक का एक किसान लाखों रुपये कमा रहा है और महज 1200 स्क्वॉयर फीट एरिया की मदद से। उडुपी के एक टाउन शंकरपुर में जोसेफ लोबो नाम का एक किसान 3 लाख रुपये प्रति किग्रा के भाव से आम बेचकर ये पैसे कमा रहा है। जानिए क्या है इस आम में खास बात

अपडेटेड May 25, 2024 पर 1:10 PM
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World's Most Expensive Mango: अपने असाधारण स्वाद और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध जापानी किस्म का आम मियाजाकी दुनिया का सबसे महंगा आम है। 3 लाख रुपये प्रति किग्रा के भाव के हिसाब से इसके हर एक काम कीमत करीब 10 हजार रुपये है।

World's Most Expensive Mango: दुनिया का सबसे महंगा आम बेचकर कर्नाटक का एक किसान लाखों रुपये कमा रहा है और महज 1200 स्क्वॉयर फीट एरिया की मदद से। उडुपी के एक टाउन शंकरपुर में जोसेफ लोबो नाम का एक किसान 3 लाख रुपये प्रति किग्रा के भाव से आम बेचकर ये पैसे कमा रहा है। कीमत से तो पता चल ही गया होगा कि यह आम भी कोई साधारण आम नहीं है बल्कि यह जापान का खास मियाजाकी (Miyazaki) आम है। लोबो ने अपनी 1,200 वर्ग फुट की छत को दुर्लभ और विदेशी फलों के हरे-भरे बगीचे में बदल दिया है, जिसमें मियाजाकी आम भी है।

Miyazaki किस्म के एक आम की कीमत ₹10000

अपने असाधारण स्वाद और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध जापानी किस्म का आम मियाजाकी दुनिया का सबसे महंगा आम है। 3 लाख रुपये प्रति किग्रा के भाव के हिसाब से इसके हर एक काम कीमत करीब 10 हजार रुपये है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लोबो ने दावा किया कि इसकी अधिक कीमत के चलते ही देश के कई किसानों ने मियाजाकी की खेती शुरू की है।


जोसेफ लोबो के बारे में

लोबो ने मियाजाकी आमों की खेती पिछले साल 2023 में शुरू की थी। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते पहले साल कोई फल नहीं मिला। हालांकि शुरुआती झटके से विचलित हुए बिना लोबो डटे रहे और इस साल उनके प्रयास सफल हुए। लोबो की छत पर सिर्फ मियाजाकी आम ही नहीं, बल्कि कई प्रकार के दुर्लभ और विदेशी फल हैं। इसमें जावा का सफेद बेर, ब्राजील की चेरी, ताईवान के दुर्लभ संतरे की एक किस्म और शंकरपुरा का प्रसिद्ध बेला भी है। इसमें हर मौसम में फल देने वाले आम, सात प्रकार की चेरी, सफेद बनफशा, बिना बीज वाला नींबू और मिरेकल बेरी भी है।

लोबो के बगीचे में औषधीय पौधे और सब्जियां भी हैं। सिर्फ यही नहीं, लोबो मधुमक्खी पालन भी करते हैं, जो न केवल परागण में सहायता करता है बल्कि उनके पौधों के स्वास्थ्य को भी बढ़ाता है। कर्नाटक में उन्होंने ही सबसे पहले हाइड्रोपोनिक तकनीक के जरिए चमेली की खेती शुरू की थी। इस तकनीक के तहत बिना मिट्टी पोषक तत्वों से भरपूर पानी में पौधे उगाए जाते हैं। वह डेयरी फार्मिंग भी कर रहे हैं। उनके रूफटॉप गार्डेन में रूद्राक्ष, कपूर, खजूर, केला और काली मिर्च जैसे पौधे भी हैं।

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