Yasin Malik Terror Funding Case: टेरर फंडिंग के मामले में दिल्ली की एक अदालत से दोषी करार दिए गए कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक (Yasin Malik Terror Funding Case) की सजा का ऐलान हो गया है। दिल्ली की NIA कोर्ट ने यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
एडवोकेट उमेश शर्मा ने कहा कि कोर्ट ने यासीन मलिक को 2 मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने 10 लाख रुपये का जुमार्ना भी लगाया है। उन्होंने कहा कि अगर जुर्माना नहीं देते हैं तो उसके बदले सजा मिलेगी। यह हाईकोर्ट में सिर्फ सजा के खिलाफ अपील कर सकते हैं, निर्णय के खिलाफ नहीं। यासीन मलिक की सभी सजा एक साथ चलेंगी।
वहीं, अदालत द्वारा नियुक्त न्याय मित्र एडवोकेट अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि यासीन मलिक को धारा 17 UAPA के तहत आजीवन कारावास और 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जबकि कोर्ट ने 120B के तहत 10 साल कैद और 10,000 रुपये जुर्माना लगाया है। वहीं, IPC और UAPA की अन्य धाराओं के तहत सजा सुनाई गई है।
कोर्ट में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की तरफ से यासिन मलिक को फांसी देने की मांग की गई थी। वहीं, बचाव पक्ष ने उम्रकैद की मांग की थी। कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को पिछले हफ्ते दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने दोषी करार दिया था।
19 मई कोर्ट ने यासीन मलिक को ठहराया था दोषी
NIA अदालत ने टेरर फंडिंग मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत लगाए गए आरोप समेत सभी आरोपों को स्वीकार करने वाले यासीन मलिक को गुरुवार (19 मई) को दोषी करार दिया था।
विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अधिकारियों को मलिक पर जुर्माना लगाए जाने के लिए उसकी वित्तीय स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए थे। साथ ही सजा की अवधि पर दलीलों के लिए मामले की सुनवाई के वास्ते 25 मई की तारीख तय की थी।
मलिक ने सभी आरोपों को किया स्वीकार
यासीन पर सख्त UAPA के तहत लगाए गए आरोप भी शामिल हैं। पिछली सुनवाई में यासीन ने अपने वकील को वापस ले लिया था। उसने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया था।मलिक ने अदालत में कहा था कि वह खुद के खिलाफ लगाए आरोपों का विरोध नहीं करता।
इन आरोपों में UAPA की धारा 16 (आतंकवादी कृत्य), 17 (आतंकवादी कृत्यों के लिए धन जुटाना), 18 (आतंकवादी कृत्य की साजिश) और धारा 20 (आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होना) तथा IPC की धारा 120-बी (आपराधिक षडयंत्र) और 124-A (राजद्रोह) शामिल हैं।
कई अन्य कश्मीरी अलगाववादी नेताओं के खिलाफ आरोप तय
अदालत ने पूर्व में, फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे, शब्बीर शाह, मसरत आलम, मोहम्मद युसूफ शाह, आफताब अहमद शाह, अल्ताफ अहमद शाह, नईम खान, मोहम्मद अकबर खांडे, राजा मेहराजुद्दीन कलवल, बशीर अहमद भट, जहूर अहमद शाह वटाली, शब्बीर अहमद शाह, अब्दुल राशिद शेख तथा नवल किशोर कपूर समेत कश्मीरी अलगाववादी नेताओं के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए थे।
लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद और हिज्बुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किया गया। इन सभी को मामले में घोषित अपराधी बताया गया है। यह मामला हाफिज सईद और हुर्रियत कांफ्रेंस के सदस्यों सहित अलगवावादी नेताओं की कथित साजिश से संबद्ध है।
कश्मीर में आतंक फैलाने के लिए पैसे लेने का आरोप
इन आतंकियों ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन- हिजबुल मुजाहिदीन, दुख्तारन ए मिल्लत, लश्कर ए तैयबा और अन्य के सक्रिय सदस्यों के साथ हवाला सहित विभिन्न अवैध माध्यमों से देश-विदेश से धन जुटाने की साजिश रची थी।
यह धन जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों और कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों पर पथराव करने, स्कूलों को जलाने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के कृत्य के लिए था।
NIA के मुताबिक, जांच से यह साबित हुआ है कि यासिन मलिक जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का प्रमुख था। इस दौरान वह जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिवधियों में संलिप्त था। मामले में शेष आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी है।