संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को (UNESCO) ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के दुर्गा पूजा (Durga Puja) उत्सव को विरासत का दर्जा दिया। यूनेस्को ने ट्विटर पर दुर्गा माता की मूर्ति वाली एक तस्वीर को शेयर करते हुए कहा, "कोलकाता में दुर्गा पूजा को यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में शामिल किया गया है। भारत को शुभकामनाएं।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi)ने इस फैसले की सराहना करते हुए इसे भारतवासियों के लिए गर्व और खुशी का पल करार दिया है। मोदी ने एक ट्वीट में कहा, , "प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व और खुशी का पल। दुर्गा पूजा हमारी सर्वोत्तम परंपराओं और लोकाचार को पेश करती है और कोलकाता की दुर्गा पूजा का अनुभव हर किसी को जरूर करना चाहिए।"
यूनेस्को ने 2008 में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची जारी करने का काम शुरू किया था। इसका मकसद दुनियाभर की कुछ बेहतरीन अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की बेहतर सुरक्षा और उनके महत्व के बारे में दुनिया को जागरुक करना था। दुनिया भर से आए अमूर्त सांस्कृति विरासत के प्रस्तावों को यूनेस्को की समिति जांच करती है और उसके बाद उसे योग्य पाए जाने पर इस सूची में शामिल किया जाता है। भारत की तरफ से इस साल कोलकाता के दूर्गा पूजा को प्रस्ताव भेजा गया था।
यूनेस्को ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है, "दुर्गा पूजा को धर्म और कला के सार्वजनिक प्रदर्शन के साथ-साथ सहयोगी कलाकारों और डिजाइनरों के लिए एक बड़े मौके के रूप में देखा जाता है।" यूनेस्को ने कहा कि दुर्गा पूजा समारोह में हाशिए के समूहों, व्यक्तियों के साथ-साथ महिलाओं की भी भागीदारी देखने को मिलती है। साथ ही इस दौरान "वर्ग, धर्म और जातीयता का विभाजन टूट जाता है।"
यूनेस्को ने कहा कि कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडालों को जिस शिल्प कौशल के साथ बनाया जाता है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
बता दें कि यह पहली बार नहीं है, जब यूनेस्को की अमूर्त विरासत में किसी भारतीय पर्व को जगह मिली है। इससे पहले 2017 में कुंभ मेले को भी यूनेस्को अपनी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कर चुका है। वहीं इससे भी पहले 2016 में नवरोज और योग और 2008 में रामलीला को इस सूची में शामिल किया गया था।