सेना ने अपने जवानों और अफसरों को चीन की भाषा मंदारिन सिखाने पर फोकस बढ़ा दिया है। इसकी वजह Line of Actual Control (LAC) पर लंबे समय से बना गतिरोध है। इंडिया और चीन की सीमा 3,400 किलोमीटर लंबी है। दोनों देशों के रिश्तों में आई तल्खी के बाद इंडिया LAC पर करीबी नज रख रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जूनियर और सीनियर मिलिट्री कमांडर्स के मंदारिन के ज्ञान को बढ़ाने के लिए कई कदम कमद उठाए गए हैं। इसकी एक वजह यह है कि मंदारिन की अच्छी जानकारी होने पर जरूरत पड़ने पर इन अफसरों को चीन के अफसरों के साथ बातचीत करने में किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी।
आर्मी के नॉर्दन, ईस्टर्न और सेंट्रल कमांड के लैंग्वेज स्कूलों में मंदारिन के कई कोर्सेज शुरू किए गए हैं। आर्मी मंदारिन भाषा के कई स्क्रिप्ट्स और लिटरेचर के ट्रांसलेशन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल कर रही है। एक सूत्र ने बताया कि मंदारिन का अच्छा ज्ञान होने से सेना के जवान बेहतर तरीके से अपनी बात चीन के अफसरों को समझा सकेंगे।
सेना में हर रैंक में मंदारिन की अच्छी जानकारी रखने वाले अफसर हैं। इनमें ऑफिशर्स से लेकर जूनियर कमिशंड अफसर शामिल हैं। सेना को हाल में Territorial Army में भी मंदारिन की जानकारी बढ़ाने के लिए इंटरप्रेटर्स की नियुक्ति का एप्रूवल मिल गया है। इस बारे में रविवार को नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि आर्मी ने छह इंटरप्रेटर्स की नियुक्ति के लिए आवेदन मंगाए हैं। पांच नियुक्ति सिविलियंस से और एक एक्स-सर्विस ऑफिसर्स से की जाएगी। इसके लिए उम्र सीमा 18 से 42 साल है।
उधर, चीन की सेना ने भी हिन्दी इंटरप्रेटर्स की भर्ती की है। इसका मकसद इंडिया के बारे में खुफिया जानकारियां जुटाना है। इस साल मई में खबर आई थी कि चीन अपनी यूनिवर्सिटीज में हिन्दी इंटरप्रेटर्स की नियुक्ति कर रहा है।
आर्मी ने राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी (RRU), सेंट्ल यूनिवर्सिटी ऑफ गुजरात (CUG) और शिव नादर यूनिवर्सिटी (SNU) से समझौता किया है। इसका मकसद जवानों और अफसरों को मंदारिन सिखाना है। इसके अलावा दिल्ली में स्कूल ऑफ फॉरेन लैंग्वेज और पंचमढ़ी में आर्मी ट्रेनिंग स्कूल में भी मंदारिन सिखाने वाले लोगों की संख्या बढ़ाई जा रही है।