इंटेग्रिस मेडटेक, APPL कंटेनर्स और एल्पाइन टेक्सवर्ल्ड को सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से अपने IPO लॉन्च करने की मंजूरी मिल गई है। कैपिटल मार्केट रेगुलेटर ने अंजलि लैबटेक के IPO पेपर्स को भी मंजूरी दे दी है। इसने अक्टूबर 2025 में कॉन्फिडेंशियल रूट से पेपर्स फाइल किए थे। SEBI ने इंटेग्रिस मेडटेक के ड्राफ्ट पेपर्स पर 13 फरवरी और अंजलि लैबटेक के ड्राफ्ट पेपर्स पर 17 फरवरी को अपने ऑब्जर्वेशन जारी किए। APPL कंटेनर्स और एल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट्स पर 20 फरवरी को ऑब्जर्वेशन जारी किए गए।
SEBI की ओर से ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) पर ऑब्जर्वेशन जारी करने का मतलब है कि कंपनी को अगले एक साल के अंदर अपना IPO लॉन्च करने की इजाजत है। हालांकि, जो कंपनी कॉन्फिडेंशियल रूट से अपना ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट फाइल करती है, उसे अपना IPO लाने के लिए 18 महीने का समय मिलता है।
मेडिकल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म इंटेग्रिस मेडटेक ने अक्टूबर 2025 में IPO के जरिए फंड जुटाने के लिए SEBI के पास ड्राफ्ट पेपर्स फाइल किए थे। कंपनी ने नए शेयर जारी करके 925 करोड़ रुपये जुटाने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही प्रमोटर ऑफर-फॉर-सेल (OFS) के जरिए 2.16 करोड़ इक्विटी शेयर बेचेंगे। कंपनी प्री-IPO राउंड में 185 करोड़ रुपये तक जुटाने पर भी विचार कर सकती है। ऐसा हुआ तो IPO में नए शेयरों के इश्यू का साइज घट जाएगा। नए शेयर जारी कर मिलने वाली रकम का इस्तेमाल मुख्य रूप से कर्ज का बोझ 696.3 करोड़ रुपये कम करने के लिए किया जाएगा। बाकी रकम आम कॉर्पोरेट कामों के लिए दी जाएगी।
गुजरात की कंटेनर बनाने वाली कंपनी APPL Containers ने सितंबर 2025 में कैपिटल मार्केट रेगुलेटर के पास IPO पेपर्स फाइल किए थे। इसका पब्लिक इश्यू 12.5 लाख नए शेयरों और प्रमोटर्स की ओर से 25.6 लाख शेयरों के ऑफर-फॉर-सेल का कॉम्बिनेशन है। फ्रेश इश्यू से होने वाली कमाई का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल की जरूरतों का पूरा करने, कर्ज चुकाने और आम कॉर्पोरेट कामों के लिए करने का प्रस्ताव है।
अहमदाबाद की टेक्सटाइल कंपनी Alpine Texworld ने सितंबर 2025 में ड्राफ्ट पेपर्स फाइल किए थे। इसके पब्लिक इश्यू में 1.5 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। IPO से हासिल होने वाले पैसों में से 32 करोड़ रुपये का इस्तेमाल ग्रे फैब्रिक प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए एक नई वीविंग यूनिट लगाने में किया जाएगा। इसके अलावा 52.2 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज को कुछ हद तक चुकाने के लिए किया जाएगा। बाकी फंड का इस्तेमाल आम कॉर्पोरेट कामों के लिए किया जाएगा।
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