इस साल आईपीओ मार्केट में खूब हलचल रही। कंपनियों ने आईपीओ से 1.77 लाख करोड़ रुपये जुटाए। यह 2024 में आईपीओ से जुटाए गए फंड से ज्यादा है। कुछ आईपीओ ने इनवेस्टर्स को निराश किया तो कुछ में उन्हें अच्छा लिस्टिंग गेंस मिला। आईपीओ में कई इनवेस्टर्स सिर्फ लिस्टिंग गेंस के लिए बोली लगाते हैं। कुछ कंपनी के फंडामेंटल्स को देखकर लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं। आईपीओ में निवेश का प्रोसेस क्या है, इसमें निवेश के फायदे क्या हैं, किस आईपीओ में आपको निवेश करना चाहिए? आइए इन सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं।
आईपीओ में शेयरों के लिए बोली लगाने का प्रोसेस
आईपीओ में निवेश करने के लिए आपके पास बैंक अकाउंट, पैन कार्ड और डीमैट अकाउंट होना चाहिए। अगर ये चीजें आपके पास हैं तो ऑनलाइन किसी ब्रोकरेज फर्म के प्लेटफॉर्म के जरिए आईपीओ में बोली लगा सकते हैं। कंपनी आईपीओ में शेयर के प्राइस बैंड और लॉट साइज का ऐलान करती है। कम से कम एक लॉट साइज के लिए बोली लगाना जरूरी है। इनवेस्टर को यह बताना होता है कि वह प्राइस बैंड में किस कीमत पर शेयरों के लिए बोली लगाना चाहता है।
इनवेस्टर्स की कैटेगरी के हिसाब से शेयर रिजर्व
कंपनी आईपीओ में इनवेस्टर्स की अलग-अलग कैटेगरी के लिए शेयर रिजर्व करती है। किसी कैटेगरी में शेयर इश्यू होने की तय संख्या से ज्यादा शेयरों के लिए बोली मिलने पर शेयरों का आवंटन कंपनी लॉटरी के जरिए करती है। इश्यू खुलने के बाद उसके सब्सक्रिप्शन को लेकर खबरें आने लगती हैं। किसी आईपीओ के कई गुना सब्स्क्राइब होने का मतलब है कि ज्यादा इनवेस्टर्स उस आईपीओ के लिए बोली लगाना चाहते हैं। कई इनवेस्टर्स किसी आईपीओ में निवेश का फैसला उसके सब्सक्रिप्शन के डेटा के आधार पर करते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आईपीओ में निवेश का फैसला लेने का यह तरीका सही नहीं है।
आईपीओ में शेयरों के लिए बोली लगाने के फायदे
आईपीओ में कई इनवेस्टर्स सिर्फ लिस्टिंग गेंस के लिए निवेश करते हैं। पिछले 3-4 सालों में यह चलन बढ़ा है। शेयरों के प्रीमियम पर लिस्ट होते ही वे मुनाफावसूली करते हैं। इसका मतलब है कि वह मुनाफा लेकर शेयर बेच देते हैं। कई इनवेस्टर्स लंबी अवधि के लिहाज से शेयरों में निवेश करते हैं। कंपनी के फंडामेंटल्स के बारे में आश्वस्त होने पर वे ऐसा करते हैं। कई कंपनियों के शेयर की कीमत आईपीओ की कीमत के मुकाबले कुछ ही साल में कई गुना हो जाती है। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों को बड़ा मुनाफा होता है, जबकि लिस्टिंग गेंस के लिए बोली लगाने वाले इनवेस्टर यह मौका चूक जाते हैं।
एलॉटमेंट के 2-3 दिन बाद शेयरों की लिस्टिंग
आम तौर पर आईपीओ में निवेश के लिए इनवेस्टर्स को तीन वर्किंग डेज मिलते है। उसके 2-3 दिन बाद कंपनी शेयरों का एलॉटमेंट करती है। उसके 2-3 दिन बाद शेयर स्टॉक मार्केट में लिस्ट होते हैं। लिस्टिंग गेंस के लिए आईपीओ में निवेश करने वाले इनवेस्टर्स की नजरें शेयरों की लिस्टिंग पर लगी होती हैं। कोई शेयर जितना ज्यादा प्रीमियम पर लिस्ट होता है, इनवेस्टर्स को उतना ज्यादा लिस्टिंग गेंस होता है। हाल में आए एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रो के आईपीओ के शेयरों की लिस्टिंग अच्छे प्रीमियम के साथ हुई।
एसएमई और मेनबोर्ड आईपीओ के बीच फर्क
एमएसएमई अपने आईपीओ को स्टॉक एक्सचेंज के एसएमई सेगमेंट में लिस्ट कराते हैं। इन कंपनियों के आईपीओ साइज में छोटे होते हैंं। उनमें निवेश के लिए ज्यादा पैसे की जरूरत होती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एसएमई आईपीओ में रिस्क ज्यादा होता है। इसकी वजह यह है कि इन कंपनियों के बारे में ज्यादा जानकारियां उपलब्ध नहीं होती है। इसके उलट मेनबोर्ड पर लिस्ट होने वाले आईपीओ के बारे में ज्यादा जानकारियां पब्लिक डोमेन में उपलब्ध होती हैं।
हर आईपीओ में बोली लगाने से बचने की सलाह
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनवेस्टर्स को हर आईपीओ में बोली लगाने से बचना चाहिए। दूसरा, सिर्फ लिस्टिंग गेंस के लिए भी आईपीओ में बोली लगाना अच्छा आइडिया नहीं है। ऐसे इनवेस्टर्स को तब काफी निराशा होती है, जब शेयर की लिस्टिंग कमजोर यानी आईपीओ में इश्यू प्राइस से कम पर होती है। कई बार शेयरों की लिस्टिंग कमजोर होती है और उसके बाद भी शेयरों में कमजोरी बनी रहती है।
आईपीओ में बोली लगाने से पहले जरूरी है स्टडी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशक को आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी के बिजनेस को समझने की कोशिश करनी चाहिए। यह देखना चाहिए कि कंपनी के प्रोडक्ट्स या सर्विसेज की कितनी डिमांड है। यह भी देखना चाहिए कि कंपनी पर ज्यादा कर्ज तो नहीं है। इन सवालों के जवाब से पूरी तरह से आश्वस्त होने के बाद ही आईपीओ में निवेश करना चाहिए।