KSH International IPO: केएसएच इंटरनेशनल का आईपीओ खुला, क्या आपको इश्यू में इनवेस्ट करना चाहिए?

KSH International IPO इनामेल्ड राउंड वायर्स, रेक्टेंगुलर वायर्स और कंटिन्यूसली ट्रांसपोस्ड कंडक्टर्स (सीटीसी) बनाती है। इनका इस्तेमाल हाई-वोल्टेज पावर ट्रांसमिशन और ईवी ट्रैक्शन मोटर्स में होता है। कंपनी की महाराष्ट्र में तीन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज हैं, जिनकी सालाना कुल उत्पादन क्षमता 29,045 मीट्रिक टन (एमटी) है

अपडेटेड Dec 16, 2025 पर 1:54 PM
Story continues below Advertisement
केएसएच इंटरनेशनल अमेरिका, जर्मनी और जापान सहित 24 देशों को सप्लाई करती है।

केएसएच इंटरनेशनल का आईपीओ 16 दिसंबर को खुल गया है। यह कंपनी मैगनेट-वाइंडिंग वायर्स बनाने वाली देश की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी है। यह इस सेगमेंट की सबसे बड़ी एक्सपोर्टर भी है। यह आईपीओ 710 करोड़ रुपये का है। इसमें कंपनी 420 करोड़ रुपये के नए शेयर इश्यू करेगी। 290 करोड़ रुपये का ऑफर-फॉर-सेल (ओएफएस) होगा। कंपनी ने प्रति शेयर 365-384 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है।

कंपनी की महाराष्ट्र में तीन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज

KSH International IPO इनामेल्ड राउंड वायर्स, रेक्टेंगुलर वायर्स और कंटिन्यूसली ट्रांसपोस्ड कंडक्टर्स (सीटीसी) भी बनाती है। इनका इस्तेमाल हाई-वोल्टेज पावर ट्रांसमिशन और ईवी ट्रैक्शन मोटर्स में होता है। कंपनी की महाराष्ट्र में तीन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज हैं, जिनकी सालाना कुल उत्पादन क्षमता 29,045 मीट्रिक टन (एमटी) है। कंपनी वाइंडिंग वायर्स की सप्लाई भी करती है, जिसका इस्तेमाल ट्रांसफॉर्मर्स, मोटर्स, अल्टरनेटर्स और जेनरेटर्स में होता है।


रेवेन्यू में एक्सपोर्ट्स की 30 फीसदी हिस्सेदारी

कंपनी का अपने कस्टमर्स के साथ लंबा रिश्ता है। FY25 में आपरेटिंग रेवेन्यू में पुराने कस्टमर्स की हिस्सेदारी 95 फीसदी थी। कंपनी के रेवेन्यू में एक्सपोर्ट्स की हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी है। यह अमेरिका, जर्मनी और जापान सहित 24 देशों को सप्लाई करती है। हिताची एनर्जी, जीई वेरनोवा, सीमेंस एनर्जी और भेल (BHEL) जैसी कंपनियां केएसएच इंटरनेशनल की क्लाइंट्स हैं। अभी कंपनी की उत्पादन क्षमता 29,045 मीट्रिक टन है। कंपनी अपनी 80 फीसदी क्षमता का इस्तेमाल कर रही है।

ऑपरेटिंग और पीएटी मार्जिन प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से बेहतर

घरेलू वाइंडिंग वायर इंडस्ट्री में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी करीब 9 फीसदी है। प्रतिद्वंद्वी कंपनियों प्रीसिजन वायर्स इंडिया और राम रत्न वायर्स में से दोनों की बाजार हिस्सेदारी 14-14 फीसदी है। लेकिन, केएसएच इंटरनेशनल का ऑपरेटिंग और पीएटी मार्जिन प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से बेहतर है। कंपनी की बैलेंसशीट पर कर्ज है। लेकिन, कंपनी आईपीओ से हासिल कुछ पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी। कंपनी के रिटर्न रेशियो बेहतर हैं। लेकिन, वर्किंग कैपिटल की ज्यादा जरूरत का असर कैश-फ्लो वर्जन पर पड़ता है।

यह भी पढ़ें: ICICI Prudential AMC IPO: आखिरी दिन QIB और NII की भारी डिमांड से 3.51 गुना सब्सक्राइब हुआ इश्यू, लेटेस्ट GMP के साथ जानिए पूरी डिटेल्स

क्या आपको निवेश करना चाहिए?

कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ पर कॉपर की ऊंची कीमतों का असर पड़ा है। FY26 की अनुमानित अर्निंग्स के मुकाबले शेयर की कीमत 28 गुना है। यह प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मुकाबले कम है। इसलिए इस आईपीओ से लिस्टिंग गेंस हो सकता है। कंपनी के रेवेन्यू पर कॉपर और एल्युमीनियम जैसी कमोडिटी की कीमतों में उतारचढ़ाव का असर पड़ सकता है। कंपनी के लिए कंसंट्रेशन रिस्क दिख रहा है, क्योंकि इसके रेवेन्यू में टॉप 10 कस्टमर्स की 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।