LIC ने इंडिया का सबसे बड़ा आईपीओ पेश किया है। यह इश्यू करीब 21,000 करोड़ रुपये का है। इससे पहले पेटीएम का 18,300 करोड़ रुपये का इश्यू देश का सबसे बड़ा आईपीओ था। खुलने के दूसरे दिन एलआईसी के आईपीओ के पूरी तरह सब्सक्राइब हो जाने की उम्मीद है। इस इश्यू को लेकर पिछले कई हफ्तों से बाजार में हलचल है। इस इश्यू में 9 मई तक बोली लगाई जा सकती है। सवाल है कि क्या सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने वाली एलआई शेयरों की लिस्टिंग के बाद Sensex या Nifty 50 का हिस्सा बन पाएगी?
इस सवाल का जवाब नहीं है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एलआईसी शेयरों की लिस्टिंग के बाद सेंसेक्स और प्रमुख विदेशी सूचकांकों का हिस्सा नहीं बन पाएगी। उनका कहना है कि एलआईसी के सेंसेक्स, निफ्टी 50, MSCI, FTSE जैसे देशी-विदेशी सूचकांकों में शामिल होने की उम्मीद नहीं है। इसकी वजह यह है कि इसके शेयरों का फ्री-फ्लोट बहुत कम है। फ्री-फ्लोट से मतलब उन शेयरों है, जो खरीद और बिक्री के लिए स्टॉक एक्सचेंज के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होते हैं।
इंडियन गवर्नमेंट की एलआईसी में 100 फीसदी हिस्सेदारी है। सरकार आईपीओ में अपनी 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है। वह एलआईसी के करीब 22 करोड़ शेयर बेच रही है। इससे मिलने वाला पैसा सरकार के पास जाएगा। इसलिए इस इश्यू को ऑफर फॉर सेल (OFS) कहा जा रहा है। सरकार ने आईपीओ के लिए एलआईसी की 6 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन लगाई है।
किसी कंपनी के शेयर का सेंसेक्स या निफ्टी 50 का हिस्सा बनने के लिए F&O सेगमेंट में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होना जरूरी है। एडलवाइज के अल्टरनेटिव एवं क्वाटिटेटिव ट्रेडिंग डेस्क के मुताबिक, एलआईसी के MSCI जैसे पैसिव इनडाइसेज का हिस्सा बनने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि इसके लिए फर्स्ट या सेकेंड ट्रेडिंग में कम से कम 10.7 लाख करोड़ रुपये का मार्केट कैप जरूरी है।
FTSE जैसे सूचकांकों में सितंबर के बाद एलआईसी के शामिल होने की उम्मीद की जा सकती है। आईआईएफएल ने भी कहा है कि एलआईसी के निफ्टी और सेंसेक्स जैसे बड़े सूचकांकों में जल्द शामिल होने की उम्मीद नहीं है। IIFL का कहना है कि FTSE में शामिल होने के लिए 4.31 अरब डॉलर का मार्केट कैप होना जरूरी है।