LIC IPO का ब्लूप्रिंट आ गया है। सरकार ने प्रति शेयर 901-949 रुपये प्राइस बैंड तय किया है। इस इश्यू का इंतजार लंबे समय से था। हालांकि, पहले के अनुमान के मुकाबले इस इश्यू का आकार बहुत छोटा है। पहले सरकार ने इस आईपीओ से 60,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाने का प्लान बनाया था। अब सरकार सिर्फ 21,000 करोड़ रुपये जुटाने जा रही है। सवाल है कि क्या आईपीओ में शेयर की कीमत बहुत ज्यादा है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह हाल में आई सबसे महंगे आईपीओ में से एक है। एलआईसी ने कहा है कि फाइनेंशियल ईयर 2020-21 में उसकी अर्निंग प्रति शेयर (EPS) 4.70 रुपये थी। फाइनेंशियल ईयर 2019-20 में ईपीएस 4.29 रुपये थी। फाइनेंशियल ईयर 2018-19 में ईपीएस 4.15 रुपये थी। इस तरह प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर यानी 949 रुपये पर इस शेयर की वैल्यूएशन (PE) 202 गुना आती है।
किसी शेयर का 202 का पीई सस्ता नहीं कहा जा सकता। हाल में आए आईपीओ में यह संभवत: सबसे महंगा है। एलआईसी का शेयर न सिर्फ दूसरी जीवन बीमा कंपनियों के शेयरों के मुकाबले काफी महंगा है बल्कि यह अडानी विल्मर, डिक्शॉन टेक और आईआरसीटीसी के शेयरों से भी महंगा है। इस तरह लिस्टिंग के बाद LIC सबसे महंगी सरकारी कंपनी बन जाएगी।
अब आपको हम सबसे महंगी सरकारी कंपनियों के बारे में बताते हैं। इस लिस्ट में पहला नाम एचएमटी (TTM पीई-176) है। ITDC दूसरे नंबर पर है इसका पीई 174 है। IRCTC का पीई 110 है। नेशनल फर्टिलाइजर का पीई 51 है। कनटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया का पीई 48 और हिंदुस्तान कॉपर का पीई 45 है।
जहां तक स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों का सवाल है तो एलआईसी का शेयर सबसे महंगा होगा। दूसरी सबसे बड़ी प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनी HDFC Life Insurance Company के शेयर का पीई 82 है। ICIC Pru Life Insurance के शेयर का पीई 79 है। एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस का पीई 78 है। लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों का औसत पीई 80 है।
सवाल है कि क्या यह ज्यादा वैल्यूएशन इनवेस्टर्स के लिए चिंता की बात है? ज्यादा इनवेस्टर्स का कहना है कि ज्यादा वैल्यूएशन को लेकर फिक्र नहीं करनी चाहिये। इसकी वजह यह है कि एलआईसी मार्केट लीडर है। इसका मार्केट शेयर बहुत अच्छा है। इसलिए इसका प्रीमियम बहुत ज्यादा है। एलआईसी की ग्रोथ की संभावनाएं भी अच्छी है।
हेम सिक्योरिटीज की सीनियर रिसर्च एनालिस्ट आस्था जैन ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया, "अगर इश्यू का आकार घटाकर 21,000 रुपये कर दिया गया है तो निश्चित तौर पर वैल्यूएशन पहले के मुकाबले बेहतर होगी, क्योंकि इश्यू साइज घटने के बाद मार्केट वैल्यूएशन इम्बेडेड वैल्यू की 1.1 गुना होगी, जो वाजिब लगता है।"