HMA Agro IPO Subscription 3rd Day: बफैलो मीट यानी बीफ एक्सपोर्ट करने वाली दिग्गज कंपनी एचएमए एग्रो इंडस्ट्रीज का आईपीओ सौ फीसदी सब्सक्राइब होने की कगार पर है। हालांकि इस इश्यू को लेकर खुदरा निवेशकों की दिलचस्पी नहीं दिख रही है, वहीं 480 करोड़ रुपये के इस आईपीओ के लिए बाकी दोनों कैटेगरी क्वालिफाईड इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (QIB) और नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का आरक्षित हिस्सा पूरा भर चुका है। ओवरऑल यह इश्यू अभी तक 0.98 गुना सब्सक्राइब हुआ है। तीसरे दिन तक QIB का हिस्सा 1.04 गुना, NII का 1.92 गुना और खुदरा निवेशकों का महज 0.54 गुना भरा है।
Grey Market से क्या हैं संकेत
एचएमए एग्रो इंडस्ट्रीज का इश्यू तीसरे दिन फुल सब्सक्राइब हो गया है। हालांकि ग्रे मार्केट में इसकी स्थिति कमजोर हुई है। इश्यू खुलने से पहले इसके शेयर प्राइस बैंड के अपर प्राइस के हिसाब से 28 रुपये की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर थे। अब यह 22 रुपये पर है। हालांकि एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फाइनेंशियल्स और फंडामेंटल्स के आधार पर निवेश का फैसला लेना चाहिए। नीचे कैटेगरीवाइज आईपीओ सब्सक्रिप्शन की डिटेल्स दी जा रही है।
480 करोड़ रुपये के इस आईपीओ में शनिवार 24 जून तक पैसे लगा सकेंगे। इसके तहत 150 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी होंगे और 330 करोड़ रुपये के शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो (OFS) के तहत बिक्री होगी। इस इश्यू में 555-585 रुपये के प्राइस बैंड और 25 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकते हैं यानी कि प्राइस बैंड के अपर प्राइस के हिसाब से खुदरा निवेशकों को इसमें के कम से कम 14,625 रुपये डालने हैं। शेयरों की फेस वैल्यू 10 रुपये है।
आईपीओ की सफलता के बाद शेयरों का अलॉटमेंट 29 जून को फाइनल होगा। जिन्हें इसके शेयर नहीं अलॉट होंगे, उनके पैसे 30 जून को रिफंड होगे और जिन्हें अलॉट होंगे, उनके डीमैटे खाते में इसे 3 जुलाई को भेजा जाएगा। शेयरों की बीएसई-एनएसई पर एंट्री 4 जुलाई को है। नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।
एचएमए दो भाईयो गुलजार अहमद और वाजिद अहमद की कंपनी है। दोनों इसके फाउंडिंग प्रमोटर्स हैं। गुलजार अहमद चेयरमैन और पूर्णकालिक निदेशक हैं, जबकि वाजिद अहमद बोर्ड के एमडी हैं। इसके कारोबार की बात करें तो यह कंपनी बीफ, सब्जियों और अनाज बेचती है। बफैलो मीट यानी बीफ को एक्सपोर्ट करने के मामले में यह देश की बड़ी कंपनियों में शुमार है और इसकी एक्सपोर्ट में 10 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है। इसके प्रोडक्ट्स की बिक्री ब्लैक गोल्ड, कामिल और एचएमए के ब्रांड नाम से होती है। इसकी 90 फीसदी बिक्री निर्यात के रूप में होती है। और निर्यात 40 से अधिक देशों में होता है।
इसके पैकेज्ड मीट प्रोसेसिंग के चार प्लांट अलीगढ़, मोहाली, आगरा और पारभानी में हैं और अब यह हरियाणा में एक और ऐसा प्लांट खोलने की तैयारी मे है। इसके अलावा उन्नाव में एक और प्लांट के लिए यह जमीन ले रही है। कंपनी के पास जयपुर और मानेसर में सेकंडरी लेवल की दो मीट प्रोसेसिंग यूनिट भी है।
एचएमए एग्रो के वित्तीय सेहत की बात करें को इसका मुनाफा लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2019 में इसे 31.17 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हासिल हुआ था। अगले ही वित्त वर्ष में यह बढ़कर 45.90 करोड़, फिर वित्त वर्ष 2021 में 71.60 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2022 में 117.62 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
कंपनी का कारोबार कई देशों में फैला हुआ है और इसका कस्टमर बेस मजबूत है। भविष्य में ग्रोथ की संभावनाओं को देखते हुए मारवाड़ी फाइनेंशियल सर्विसेज के एनालिस्ट का मानना है कि यह इश्यू उचित वैल्यूएशन पर उपलब्ध है और इस कारण इसे सब्सक्राइब रेटिंग दी है।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।