NSE IPO: पिच करने के लिए इनवेस्टमेंट बैंकों को गया इनवाइट, मिड मार्च तक एडवाइजर चुनने की तैयारी

NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। NSE ने दिसंबर 2016 में अपना IPO प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था। MD और CEO आशीष चौहान का कहना है कि DRHP तैयार करने में लगभग 3 से 4 महीने लगेंगे, जिसके बाद SEBI से मंजूरी मिलने में और 2 से 3 महीने लग सकते हैं

अपडेटेड Feb 26, 2026 पर 12:57 PM
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NSE IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल होगा।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए NSE ने इनवेस्टमेंट बैंकों को एक रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी किया है। इसमें उन्हें IPO में रोल के लिए पिच करने के लिए इनवाइट किया गया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में मामले से जुड़े लोगों के हवाले से कहा गया है कि एक्सचेंज मार्च 2026 के मध्य तक IPO के लिए एडवाइजर चुनने का प्लान बना रहा है। NSE ने फरवरी महीने की शुरुआत में नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और LIC के पूर्व MD तबलेश पांडेय की अध्यक्षता में IPO कमेटी बनाई थी। साथ ही लिस्टिंग प्रोसेस की देखरेख के लिए रॉथ्सचाइल्ड एंड कंपनी को एक इंडिपेंडेंट एडवाइजर अपॉइंट किया था।

NSE IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसका मतलब है कि इसमें नए शेयर जारी नहीं होंगे। IPO का साइज 2.5 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। इससे पहले ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि टेमासेक होल्डिंग्स पीटीई. और लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (LIC), NSE IPO में शेयर बेच सकते हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया लिमिटेड और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड भी इस IPO में शेयर बेच सकते हैं। उम्मीद है कि मौजूदा शेयरधारक कंपनी की इक्विटी का 4%-4.5% हिस्सा बेचेंगे। यह भी कहा जा रहा है कि एक्सचेंज के सभी 190,000 शेयरधारकों को IPO के हिस्से के रूप में सेकेंडरी सेल में भाग लेने का विकल्प दिया जाएगा।

8 साल से ज्यादा वक्त से पेंडिंग है IPO


NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसका IPO 8 साल से ज्यादा समय से पेंडिंग है। NSE ने दिसंबर 2016 में अपना IPO प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था। पिछले साल अगस्त में, NSE ने अपने प्रस्तावित IPO के लिए SEBI से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया था। यह सर्टिफिकेट इसे मिल चुका है। NSE के MD और CEO आशीष चौहान का कहना है कि DRHP तैयार करने में लगभग 3 से 4 महीने लगेंगे, जिसके बाद SEBI से मंजूरी मिलने में और 2 से 3 महीने लग सकते हैं।

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NSE में IFCI के पास स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL) में अपनी मेजॉरिटी ओनरशिप के जरिए लगभग 2.35 प्रतिशत की इनडायरेक्ट हिस्सेदारी है। बीमा कंपनियों लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास 10.72 प्रतिशत, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास 1.64 प्रतिशत और द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के पास 1.42 प्रतिशत हिस्सेदारी है। टेमासेक के पास लगभग 4.5% हिस्सेदारी है। 31 दिसंबर, 2025 तक SBI कैपिटल के पास भी लगभग 4.5% हिस्सेदारी थी, जबकि SBI की हिस्सेदारी लगभग 3.2% है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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