रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स इस साल आईपीओ पेश करने पर विचार कर रही है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है। इसका साइज 4 अरब डॉलर से ज्यादा रहने की उम्मीद है। रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर की पेरेंट कंपनी है। इसके देश में 50 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं।
कंपनी का आईपीओ 4 अरब डॉलर से ज्यादा का हो सकता है
जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस इंडस्ट्रीज समूह की कंपनी है, जिसके चेयरमैन मुकेश अंबानी हैं। नवंबर में इनवेस्टमेंट बैंक जेफरीज ने रिलायंस जियो की 180 अरब डॉलर की वैल्यूएशन का अनुमान लगाया था। इस वैल्यूएशन पर आईपीओ में 2.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का मतलब है कि कंपनी इस आईपीओ से 4.5 अरब डॉलर जुटाएगी।
अभी सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने का रिकॉर्ड ह्यूंडई के नाम
अभी सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने का रिकॉर्ड ह्युडई मोटर इंडिया के नाम है। उसने 2025 में 3.3 अरब डॉलर का आईपीओ पेश किया था। पिछले छह सालों में जियो ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में एंट्री की है। इसने दुनिया के कई बड़े निवेशकों से पैसे जुटाए हैं। इनमें केकेआर, जनरल अटलांटिक, सिल्वर लेक और अबुधाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी शामिल हैं।
सेबी ने सरकार से 2.5% शेयर लिस्ट कराने के प्रस्ताव पर एप्रूवल मांगा है
सूत्रों ने कहा कि जियो के बड़े साइज को देखते हुए रिलायंस उसके सिर्फ 2.5 फीसदी शेयर लिस्ट कराएगी। हालांकि, सेबी ने बड़ी कंपनियों को आईपीओ में 5 फीसदी की जगह 2.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव पर फाइनेंस मिनिस्ट्री का एप्रूवल मांगा है। रेगुलेटर अभी एप्रूवल का इंतजार कर रहा है। मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा, "अगर सेबी के प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी मिल जाती है तो अभी 2.5 फीसदी शेयर लिस्ट कराने का प्लान है।"
कुछ बैंकर्स जियो के 200-240 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर दे रहे जोर
सूत्र ने बताया कि कुछ बैंकर्स जियो की 200-240 अरब डॉलर की वैल्यूएशन पर जोर दे रहे हैं। लेकिन, रिलायंस ने इस बारे में अभी फैसला नहीं लिया है। इस बारे में रिलायंस प्रतिक्रिया के लिए रायटर्स के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। सूत्र ने अपना नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी, क्योंकि इस बारे में सावर्जिनक रूप से बताने की इजाजत नहीं है।
अभी यह तय नहीं कि आईपीओ सिर्फ ओएफएस होगा या नए शेयर इश्यू होंगे
अभी यह तय नहीं है कि जियो का आईपीओ ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा या इसमें कंपनी नए शेयर इश्यू करेगी। ओएफएस में सिर्फ कंपनी के प्रमोटर्स अपने शेयर बेचते हैं। कंपनी निवेशकों को नए शेयर इश्यू नहीं करती है। उदाहरण के लिए ह्युंडई इंडिया का आईपीओ सिर्फ ऑफर फॉर सेल था। इस आईपीओ में कंपनी ने नया फंड नहीं जुटाया था। प्रमोटर्स ने सिर्फ अपने शेयर बेचे थे।
2026 में भी इंडिया का आईपीओ बाजार रह सकता है गुलजार
जियो के आईपीओ से 2026 में इंडिया के आईपीओ बाजार में रौनक बनी रह सकती है। 2025 में इंडिया आईपीओ से सबसे ज्यादा पैसे जुटाने के मामले में दुनिया में दूसरे नंबर पर रहा। 18 दिसंबर तक कंपनियों ने आईपीओ से 21.6 अरब डॉलर जुटाए थे। यह जानकारी एलएसईजी के डेटा पर आधारित है।