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IPO को लेकर सेलेक्टिव हो गए है रिटेल निवेशक, GMP की बजाय वैल्यूएशन और फंडामेंटल पर कर रहे फोकस

IPO Market: पहले रिटेल निवेशक ग्रे मार्केट प्रीमियम के आधार पर आईपीओ पर फैसला करते थे, लेकिन अब रिटेल निवेशक काफी चयनात्मक हो गए हैं। अब नए युग के निवेशक निवेश करने का फैसला करने से पहले होमवर्क करते हैं

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड May 29, 2025 पर 9:09 PM
IPO को लेकर सेलेक्टिव हो गए है रिटेल निवेशक, GMP की बजाय वैल्यूएशन और फंडामेंटल पर कर रहे फोकस
रिटेल निवेशक अब आईपीओ को लेकर सेलेक्टिव हो रहे हैं

IPO Market: शेयर मार्केट में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। मार्केट में रिटेल निवेशक अब आईपीओ को लेकर सेलेक्टिव हो रहे हैं। साल 2022 के बाद यह पहली बार है कि किसी एक वर्ष में IPO में औसत रिटेल भागीदारी में गिरावट दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रिटेल निवेशक अब केवल ग्रे मार्केट प्रीमियम(GMP) से प्रभावित नहीं हो रहे हैं, बल्कि वैल्यूएशन, कंपनी के फंडामेंटल और प्रमोटर्स की क्वालिटी जैसे पहलुओं पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

दरअसल हाल ही में Schloss Bangalore (लीला होटल) और Aegis Vopak Terminals के आईपीओ में रिटेल सेगमेंट में क्रमशः 83 प्रतिशत और 77 प्रतिशत की अंडरसब्सक्रिप्शन देखी गई। दिलचस्प बात यह है कि बेलराइज इंडस्ट्रीज के आईपीओ में, जो इन दोनों आईपीओ के खुलने से कुछ दिन पहले बंद हुआ था, खुदरा सेगमेंट लगभग 4.3 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

IPO के लिए रिटेल आवेदनों में गिरावट

प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी 2025 के बाद खुदरा आवेदनों की संख्या में कमी आई है। जनवरी में लॉन्च हुए आईपीओ के लिए औसतन 32 लाख से अधिक रिटेल आवेदन आए थे, लेकिन उसके बाद के आईपीओ में यह संख्या घटकर दो लाख से भी कम हो गई। आईपीओ को लेकर उत्साह रिटेल निवेशकों में कम होता दिख रहा है जिसकी पुष्टि हाल के कुछ आईपीओ के आवेदन देखने से होती है। रिटेल सब्स्क्रिप्शन में कमी निवेशक की भावना में बदलाव को दिखाता है।

2022 आईपीओ के लिए एक सुस्त वर्ष था। साल 2021 में जहां कंपनियों ने अपने आईपीओ से ₹1.18 लाख करोड़ फंड जुटाए थे वहीं 2022 में आंकड़ा लगभग आधा हो गया था। हालांकि, 2024 में ₹1.60 लाख करोड़ आईपीओ के माध्यम से जुटाए गए।

चयन का आधार: वैल्यूएशन और फंडामेंटल

कुछ मनी मैनेजरों का कहना है कि अब निवेशकों के आईपीओ में निवेश करने के निर्णय में वैल्यूएशन, कंपनी के फंडामेंटल और प्रमोटर्स की क्वालिटी जैसे पहलुओं पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। प्राइम डेटाबेस के अनुसार, 2025 में (24 मई तक) आईपीओ में रिटेल आवेदनों की औसत संख्या लगभग 16.7 लाख रही, जो पिछले साल के 18.9 लाख से कम है। पिछली बार यह आंकड़ा 2022 में गिरा था, जब आईपीओ में रिटेल आवेदनों की औसत संख्या 2021 के 14.45 लाख से घटकर 5.66 लाख हो गई थी।

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