शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज का आईपीओ 20 जनवरी को खुल जाएगा। यह आईपीओ 1,907.27 करोड़ रुपये का है। इसमें कंपनी 1000 करोड़ रुपये के नए शेयर इश्यू करेगी, जबकि ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के तहत 907.27 करोड़ रुपये के शेयर प्रमोटर्स बेचेंगे। इस इश्यू में 22 जनवरी तक निवेश किया जा सकता है। शेयर 28 जनवरी को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट हो सकते हैं। सवाल है कि क्या आपको इस इश्य में निवेश करना चाहिए?
शेयर की वैल्यूएशंस ज्यादा
एनालिस्ट्स का कहना है कि Shadowfax Technologies के इश्यू में शेयरों की वैल्यूएशंस में काफी ज्यादा है। यह FY25 की अर्निंग्स की 1,018 गुनी है। ब्लू डार्ट एक्सप्रेस और देल्हीवेरी जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से तुलना करने पर यह वैल्यूएशन और भी ज्यादा लगती है। कंपनी ने अपने रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में कहा है कि थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) ई-कॉमर्स मार्केट में कुछ चुनिंदा कंपनियों का दबदबा है। इनमें Bule Dart Express, Delhivery, Shadowfax और Xpressbees शामिल है। इनमें से पहली दो कंपनियां शेयर बाजार में लिस्टेड हैं।
प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मुकाबले तेज ग्रोथ
कंपनी ने आरएचपी में यह भी कहा है कि शैडोफैक्स देश में सबसे तेज ग्रोथ वाली थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स कंपनी के रूप में सामने आई है। FY22 में ई-कॉमर्स शिपमेंट में इसका मार्केट शेयर करीब 8 फीसदी था, जो FY26 की पहली छमाही में करीब 23 फीसदी हो गया। शिपमेंट वॉल्यूम के लिहाज से कंपनी की ग्रोथ 3PL इंडस्ट्री की ग्रोथ से ज्यादा रही है। कंपनी का यह भी कहना है कि एवरेज मंथली ट्रांजेक्टिव डिलीवरी पार्टनर्स के लिहाज से प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मुकाबले शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज का एक्सेस देश के सबसे बड़े क्राउडसोर्स्ड लास्ट-माइल डिलीवरी फ्लीट तक है।
एक्सप्रेस ऑर्डर की संख्या प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से कम
FY26 की पहली छमाही में शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज के एक्सप्रेस ऑर्डर की संख्या 23 लाख रही। इसकी सेवाओं की पहुंच देश में 14,758 पिन कोड्स तक है। एक्सप्रेस रेवेन्यू इस FY26 की पहली तिमाही में 123.9 करोड़ रुपये रहा। इस दौरान देल्हीवरी के एक्सप्रेस ऑर्डर की संख्या 45 लाख रही। इसकी पहुंच 18,830 पिन कोड्स तक है। इसका एक्सप्रेस रेवेन्यू 301 करोड़ रुपये रहा।
कुल रेवेन्यू में कुछ बड़े क्लाइंट्स की ज्यादा हिस्सेदारी
एनालिस्ट्स का कहना है कि शैडोफैक्स के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा क्लाइंट्स से आता है। FY25 में देल्हीवेरी के रेवेन्यू में उसके 5 टॉप क्लाइंट्स की हिस्सेदारी 39 फीसदी थी। इसका मतलब है कि शैडोफैक्स का रेवेन्यू ज्यादा कंस्ट्रेटेड हैं। इसके रेवेन्यू में इसके टॉप पांच क्लाइंट्स की हिस्सेदारी 74.6 फीसदी थी। इसके सबसे क्लाइंट की हिस्सेदारी अकेले 48 फीसदी है।
ऑपरेशंस से रेवेन्यू प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से कम
इस वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में शैडोफैक्स का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 1,806 करोड़ रुपये रहा, जो प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मुकाबले कम है। ब्लूडार्ट का 2,991 करोड़ और देल्हीवेरी का 4,853 करोड़ रुपये था। हालांकि, साल दर साल आधार पर शैडोफैक्स की रेवेन्यू ग्रोथ सबसे ज्यादा 68 फीसदी है। प्रॉफिट कमाने के मामले में ब्लूडार्ट सबसे आगे है। इसका छह महीने का प्रॉफिट 130 करोड़ रुपये रहा, जब देल्हीवेरी का 41 करोड़ और शैडोफैक्स का 21 करोड़ रुपये था।
आईपीओ देल्हीवेरी के मुकाबले प्रीमियम पर
एक्सपर्ट्स का कहना है कि शैडोफैक्स की मुनाफा कमाने की क्षमता लो है और मार्जिन को लेकर तस्वीर अभी साफ होनी बाकी है। इसका प्राइस-टू-सेल रेशियो 2.8 गुना और पी/ई रेशियो 1,018 गुना है। स्वस्तिका इनवेस्टमार्ट ने कहा है कि आईपीओ देल्हीवेरी के मुकाबले प्रीमियम पर है।