सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शेयरचैट (ShareChat) अगले 12-18 महीनों में शेयर बाजारों में लिस्ट होने की तैयारी में है। इसके को-फाउंडर और CEO अंकुश सचदेवा ने CNBC-TV18 के साथ एक खास बातचीत में यह जानकारी दी। कंपनी की वैल्यूएशन आखिरी बार 2022 में 5 अरब डॉलर आंकी गई थी। सचदेवा ने बताया कि उसके बाद से फंडिंग का कोई राउंड नहीं हुआ है। असल वैल्यूएशन अब IPO के समय ही तय होगी।
लिस्टिंग की समय-सीमा बताते हुए सचदेवा ने कहा, "हमने कई अहम पड़ाव पार कर लिए हैं, जैसे कि कैश फ्लो का पॉजिटिव होना और EBITDA का ब्रेक-ईवन पर आना। अब हमारे बिजनेस में अनुमान लगाने की बेहतर क्षमता आ गई है। पब्लिक होने के लिए अगले 12-18 महीनों का समय ही हमारा लक्ष्य है।" बता दें कि जब कंपनी की कमाई उसके रोजमर्रा के खर्चों के बराबर हो जाती है, तो उसे EBITDA ब्रेक-ईवन कहते हैं। मतलब कि कंपनी न फायदा कमा रही होती है और न नुकसान उठा रही होती है।
वित्त वर्ष 2026 में रेवेन्यू लगभग ₹1000 करोड़ रहने का अनुमान
शेयरचैट पिछले 9 महीनों से कैश फ्लो के मामले में पॉजिटिव रही है। उसे उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026 में उसका रेवेन्यू लगभग ₹1,000 करोड़ तक पहुंच जाएगा, जो पिछले साल के मुकाबले 38% की बढ़ोतरी होगी। कंपनी ने वित्त वर्ष 2024 में ₹800 करोड़ खर्च किए थे। वित्त वर्ष 2025 में खर्च ₹219 करोड़ रहा, और वित्त वर्ष 2026 में इसके घटकर लगभग ₹120-130 करोड़ रहने की उम्मीद है। सचदेवा का कहना है कि अप्रैल 2026 वह पहला महीना हो सकता है, जब कंपनी एक ही समय पर EBITDA, PAT (प्रॉफिट आफ्टर टैक्स) और कैश फ्लो, तीनों मामलों में पॉजिटिव हो जाएगी।
वैल्यूएशन के मुद्दे पर, सचदेवा ने माना कि बाजार के ऊंचे स्तरों से वैल्यूएशन में काफी गिरावट आई है। लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कंपनी का फोकस बाजार के छोटे-मोटे उतार-चढ़ावों के बजाय अपने काम को बेहतर ढंग से करने पर है। यह भी कहा कि ShareChat प्लेटफॉर्म लगातार अपने यूजर बेस को बढ़ा रहा है, रेवेन्यू में बढ़ोतरी कर रहा है। साथ ही कमाई के तरीकों को सिर्फ विज्ञापन तक सीमित न रखकर उनका विस्तार कर रहा है, जिसमें माइक्रो-ट्रांजेक्शन और सब्सक्रिप्शन जैसे तरीके भी शामिल हैं।
ShareChat अब तक जुटा चुकी है 1.2 अरब डॉलर
गूगल, टेमासेक और लाइटस्पीड वेंचर पार्टनर्स जैसे निवेशकों के निवेश से कंपनी अब तक लगभग 1.2 अरब डॉलर की पूंजी जुटा चुकी है। हालांकि, अब जब कंपनी का कैश फ्लो पॉजिटिव हो गया है, तो सचदेवा का कहना है कि कंपनी के पास अब लंबे समय तक चलने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। इसलिए, IPO से पहले उसे अब बाहरी फंडिंग पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।
शेयरचैट की शुरुआत साल 2015 में हुई थी। इसका मुख्य लक्ष्य बड़े शहरों (मेट्रो) से बाहर रहने वाले यूजर्स तक पहुंचना था। भारत में TikTok पर बैन लगने के बाद इस प्लेटफॉर्म के लिए एक बड़ा मोड़ आया। उस समय बाजार में अचानक पैदा हुए खालीपन को भरने के लिए कंपनी ने महज 30 घंटों के अंदर ही अपना शॉर्ट-वीडियो ऐप 'Moj' लॉन्च कर दिया था। आज, ShareChat और Moj के मिलाकर लगभग 20 करोड़ मंथली एक्टिव यूजर हैं।
पिछले दो सालों में कंपनी में एक बड़ा बदलाव भी आया है। यह ज्यादा कैश-बर्न यानि कि खर्च वाले दौर से एक ज्यादा अनुशासित लागत ढांचे की ओर बढ़ी है। अब जब मुनाफा कमाना मुमकिन लग रहा है और ग्रोथ स्थिर हो गई है, तो ShareChat "सर्वाइवल मोड" से बाहर निकलकर "बिल्ड मोड" में जा रही है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।