Bharat Coking Coal IPO: देश की सबसे बड़ी कोल प्रोडक्शन कंपनी कोल इंडिया (Coal India) की सब्सिडरी भारत कोकिंग कोल का आईपीओ आज सब्सक्रिप्शन के लिए खुल चुका है। आईपीओ खुलने से पहले एंकर निवेशकों से इसने ₹₹273.13 करोड़ जुटा लिए हैं। एंकरबुक में सबसे अधिक पैसे देश की सबसे बड़ी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी LIC ने लगाए जिसने ₹78 करोड़ 3.39 करोड़ शेयर हासिल किए। इसके अलावा एंकर बुक में निप्पन लाइफ इंडिया म्यूचुअल फंड और बंधन म्यूचुअल फंड ने ₹75-₹75 करोड़ के 3.26-2.36 करोड़ शेयर हासिल किए। ग्रे मार्केट में बात करें तो इसके शेयर ₹9.4 यानी 40.87% की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर हैं। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल के आधार पर ही निवेश का फैसला लेना चाहिए।
Bharat Coking Coal IPO की डिटेल्स
भारत कोकिंग कोल के ₹1,071 करोड़ के आईपीओ में ₹21-₹23 के प्राइस बैंड और 600 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकते हैं। एंप्लॉयीज को हर शेयर पर ₹2 का डिस्काउंट मिलेगा। यह इश्यू आज 9 जनवरी को खुला है और 13 जनवरी को बंद होगा। इश्यू का 50% हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित है जबकि 15% नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) और 35% खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित है। इस इश्यू में ₹107 करोड़ के शेयरों को कोल इंडिया के उन शेयरहोल्डर्स के लिए आरक्षित रखा गया है जिनके पास 1 जनवरी 2026 या इससे पहले से कोल इंडिया के शेयर पोर्टफोलियो में हैं। आईपीओ के तहत शेयरों का अलॉटमेंट 14 जनवरी को फाइनल होगा। फिर बीएसई और एनएसई पर 16 जनवरी को एंट्री होगी। इश्यू का रजिस्ट्रार केफिन टेक है।
भारत कोकिंग कोल के आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 46.57 करोड़ शेयर जारी होंगे लेकिन ये सभी शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत आएंगे और इश्यू के तहत कोई नया शेयर नहीं जारी होगा। ये शेयर कंपनी की प्रमोटर कोल इंडिया बेच रही है जो अपनी 10% हिस्सेदारी हल्की कर रही है। कोल इंडिया की योजना अपनी सभी सब्सिडरीज को वित्त वर्ष 2030 तक लिस्ट कराने की है और इसी योजना के तहत भारत कोकिंग कोल का भी आईपीओ आ रहा है।
वर्ष 1972 में बनी भारत कोकिग कोल पूरी तरह से कोल इंडिया के मालिकाना हक वाली सब्सिडरी है। यह कोकिंग कोल, नॉन-कोकिंग कोल और वाश्ड कोल बनाती है। सितंबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक कंपनी के नेटवर्क में 34 ऑपरेशनल माइन्स हैं जिसमें से 4 अंडरग्राउंड, 26 ओपनकास्ट और 4 मिक्स्ड हैं। यह झारखंड के झरिया और पश्चिम बंगाल के रानीगंज में काम करती है। भारत कोकिंग कोल का मुख्य प्रोडक्ट कोकिंग कोल है जिसका इस्तेमाल स्टील और पावर इंडस्ट्रीज में होता है। वित्त वर्ष 2025 में देश में कुल कोकिंग कोल प्रोडक्शन में इसकी 58.50% हिस्सेदारी थी।
भारत कोकिंग कोल के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2023 में इसे ₹664.78 करोड़ का शुद्ध मुनाफा हुआ था जो अगले वित्त वर्ष 2024 में उछलकर ₹1,564.46 करोड़ लेकिन अगले ही वित्त वर्ष 2025 में यह घटकर ₹1,240.19 करोड़ पर आ गया। इस दौरान कंपनी की टोटल इनकम में भी उठा-पटक दिखी। इसकी टोटल इनकम वित्त वर्ष 2023 में ₹13,018.57 करोड़ और वित्त वर्ष 2024 में ₹14,652.53 करोड़ से वित्त वर्ष 2025 में ₹14,401.63 करोड़ पर आ गई। चालू वित्त वर्ष 2026 की बात करें तो पहली छमाही अप्रैल-सितंबर 2025 में कंपनी को ₹123.88 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹6,311.51 करोड़ की टोटल इनकम हासिल हो चुकी है। सितंबर 2025 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹1,559.13 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹1,006.52 करोड़ पड़े थे।
भारत कोकिंग कोल के आईपीओ में लगाना चाहिए पैसा?
घरेलू ब्रोकरेज फर्म एसबीआई सिक्योरिटीज ने निवेशकों को इस इश्यू में पैसे लगाने की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि ₹23 के अपर प्राइस बैंड के हिसाब से पोस्ट-इश्यू कैपिटल पर 6.4x EV/EBITDA वैल्यू पर है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि कोकिंग कोल के मामले में भारत कोकिंग कोल देश की सबसे बड़ी प्रोड्यूसर है जिसकी वित्त वर्ष 2025 के घरेलू उत्पादन में 58.5% हिस्सेदारी रही। 791 करोड़ टन के अनुमानित रिजर्व और 34 ऑपरेशनल माइन्स के साथ यह देश की सबसे बड़ी कोकिल कोल रिजर्व होल्डर्स में शुमार है।
एक और घरेलू ब्रोकरेज फर्म आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने इस आईपीओ को कोई रेटिंग नहीं दी। वहीं आनंद राठी ने इसे लिस्टिंग गेन के लिए सब्सक्राइब करने की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि इसके आईपीओ का अपर प्राइस बैंड वित्त वर्ष 2025 की कमाई के मुकाबले 8.64 गुना भाव पर है और इस कारण वैल्यूएशन बेहतर है। मेहता इक्विटीज ने भी देश के कोकिंग कोल वैल्यू चेन में कंपनी की दमदार स्थिति को देखते हुए निवेशकों को लिस्टिंग गेन के लिए आईपीओ को सब्सक्राइब करने की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि कोल इंडिया के टेक्निकल और फाइनेंशियल सपोर्ट के चलते भारत कोकिंग कोल को काफी फायदा मिल रहा है।
हालांकि रिस्क की बात करें तो लॉन्ग टर्म में कोयले के भंडार में संभावित गिरावट, 80% से अधिक रेवेन्यू टॉप के 10 क्लाइंट्स से ही आने यानी क्लाइंट कंसेंट्रेशन, रिन्यूएबल एनर्जी के चलते कोयले की मांग पर असर पड़ने जैसी वजहों से भारत कोकिंग कोल के कारोबार पर असर पड़ सकता है।
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